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रुमगा रेत खदान में 200 रुपये का कथित खेल! हर ट्रैक्टर से वसूली के आरोप, बिना रॉयल्टी पर्ची रकम लेने पर उठे सवाल



डेस्क खबर | गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले की रुमगा रेत खदान एक बार फिर विवादों के घेरे में है। खनिज संपदा के उत्खनन और परिवहन की व्यवस्था के बीच अब पैसों के कथित लेन-देन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ट्रैक्टर संचालकों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि रुमगा और कोलबीरा क्षेत्र से निर्माण सामग्री लेकर गुजरने वाले वाहनों से प्रत्येक चक्कर पर 200 रुपये की मांग की जा रही है। इस मामले ने खदान के संचालन से लेकर खनिज विभाग की निगरानी तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

खदान की व्यवस्था पर सवाल, कर्मचारी के जरिए रकम लेने का आरोप!

स्थानीय लोगों का दावा है कि खदान का पट्टा जिस व्यक्ति के नाम पर जारी है, उसकी ओर से नियुक्त कर्मचारी के माध्यम से ट्रैक्टर चालकों से पैसे लिए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कथित तौर पर रकम लेने के बाद वाहन मालिकों को न तो रॉयल्टी से संबंधित कोई पर्ची मिलती है और न ही भुगतान का अन्य अधिकृत प्रमाण दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह राशि किस मद में वसूली जा रही है और इसके पीछे कौन-सा सरकारी आदेश है?

राजनीतिक संरक्षण की चर्चा ने बढ़ाई मामले की गंभीरता!

इस प्रकरण में भाजपा पिछड़ा वर्ग के एक नेता का नाम भी स्थानीय चर्चाओं में सामने आ रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि खदान की गतिविधियों और संचालन संबंधी व्यवस्थाओं में उक्त नेता का प्रभाव बताया जाता है। हालांकि, इन दावों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि खदान का वास्तविक संचालन कौन कर रहा है और पट्टाधारी के अलावा दूसरे व्यक्तियों की क्या भूमिका है। कथित वसूली के मामले में आशीष पड़वार का नाम भी सामने आया है। संबंधित सभी पक्षों का जवाब सामने आना आवश्यक है।

200 रुपये प्रति ट्रिप का हिसाब आखिर किसके पास?

यदि प्रत्येक वाहन से निर्धारित रूप से रकम ली जा रही है, तो प्रतिदिन होने वाले लेन-देन का रिकॉर्ड कहां है? क्या इसकी जानकारी खनिज विभाग के अधिकारियों को है? क्या विभाग ने ऐसी किसी व्यवस्था को मंजूरी दी है? बिना आधिकारिक रसीद भुगतान लेने के आरोपों की जांच होना बेहद जरूरी है।

प्रशासन की परीक्षा, अब कार्रवाई का इंतजार!

ग्रामीणों ने कलेक्टर और खनिज विभाग से पूरे मामले की जांच कराने की मांग उठाई है। उनकी मांग है कि खदान के पट्टे से जुड़े दस्तावेजों, संचालन की वास्तविक स्थिति, कथित वसूली और रॉयल्टी भुगतान के रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की जाए। यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रुमगा की खदान में कथित तौर पर चल रही 200 रुपये प्रति ट्रिप की वसूली का सच क्या है? क्या यह किसी वैध शुल्क का हिस्सा है या फिर नियमों से इतर रकम लेने का मामला? इन सवालों का जवाब खनिज विभाग की जांच से ही सामने आएगा। फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं।

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