
डेस्क खबर बिलासपुर ../ सरकारी अस्पतालों और कार्यालय के खराब हो चुके उपकरणों सामग्री को कंडम सामान्य वित्त नियम (GFR 217)के नियम 217 से 223के तहत निष्पादित करने का प्रावधान है ।
तीन स्थिति में ही कंडम माना जाता है लाइफ प्रौद्योगिकी समाप्त होना/मरम्मत योग्य न होना/अप्रचलित होना
*कंडम करने की निर्धारित प्रक्रिया*
(1) सबसे पहले उन उपकरणों , सामग्रियों की विस्तृत सूची तैयार की जाती है जिसे कंडम किया जाना है जिसमें उपकरण/सामग्री का नाम खरीद की तारीख,मूल कीमत ,वर्तमान स्थिति लिखी जाती है ।
(2) *कडमनेशन कमेटी का गठन* –
सामग्री को सीधे कंडम घोषित नहीं किया जा सकता इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा एक कमेटी का गठन करना होता है।तकनीकी उपकरणों (जैसे कंप्यूटर मेडिकल) का विशेषज्ञों का होना अनिवार्य होता है ।
(3) *निरीक्षण और रिपोर्ट* –
समिति हर रक उपकरण सामग्री का भौतिक निरीक्षण करने पश्चात यह प्रमाणित करती है कि उक्त उपकरण/सामग्री उपयोग के लायक नहीं है इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट पर(Form GFR 10) पर हस्ताक्षर करती है ।
*सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी*
समिति की सिफारिश मिलने पर Delegation of financial power rules के अनुसार तय किए गए अधिकारी से इसे कंडम करने की औपचारिक प्रशासनिक और वित्तीय अनुमति ली जाती हैं।
मंजूरी मिलने पश्चात उन उपकरणों एवं सामग्रियों को स्टॉक रजिस्टर से हटा दिया है जाता है।
*तीन तरीके से निपटान का प्रावधान है* –
(1) *समिति निविदा*- यदि कबाड का मूल्य समिति ने कम आंका है तो कुछ चुनिंदा डीलरों को बुला कर बोली लगाई जाती है ।
(2) *सार्वजनिक नीलामी* – अधिक मूल्य की सामग्री के लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करते हुए सार्वजनिक नीलामी की जाती है।
(3) *नष्ट करना* – ऐसी सामग्री जिसे बेचा नहीं जा सकता या खतरनाक है उसे पर्यावरण के नियमों का पालन करते हुए नष्ट किया जाता हैं।
*नीलामी से प्राप्त राशि शासन के खाता में* – जो उपकरण,सामग्री को कंडम किया जाता है वे सब शासकीय कोष से खरीदी की गई होती है, इसलिए कंडम प्रक्रिया से प्राप्त राशि को शासकीय कोष में जमा करना होता है ।
खंड चिकित्सा अधिकारी बिल्हा द्वारा नियम कायदों को कचरे के डिब्बे में डाल लाखों रूपये के उपकरण सामग्री फर्जी दस्तावेज निर्मित कर कौड़ी के मोल बेच कर शासन के कोष को क्षति पहुंचाई गई है ।
अनुपयोगी एवं खराब उपकरण सामान को को कंडम करने हेतु सूची जो बनाई गई उसमें 1 से लेकर 43 बिंदु में उपकरण सामग्री का सिर्फ नाम लिखा गया । सामग्री कब क्रय किया गया, क्या मूल्य था,किस कंपनी की थी और अवसान तिथि क्या थी का कोई उल्लेख नहीं है तथा उक्त सूची में किसी विशेषज्ञ,सक्षम प्राधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर भी नहीं है। डॉक्टर श्रीकेश गुप्ता ,डॉक्टर निकिता कंवर, डॉक्टर सान्या तिवारी , अनिल गढ़ेवाल,वाई. आर. वाल्टर mlt नलिनी सिंह स्टॉफ नर्स और हरि शंकर साहू फार्मासिस्ट के हस्ताक्षर हैं, जिसमें विषय वस्तु का कोई उल्लेख नहीं है ।
मुस्तफा प्लास्टिक मगरपारा चौक बिलासपुर, आर.के. ट्रेडर्स मंगला चौक बिलासपुर राज प्लास्टिक मगरपारा बिलासपुर नाम का फर्जी कोटेशन निर्मित किया गया है जिसे एक ही व्यक्ति द्वारा अपने हेंड राइटिंग में लिखा गया है।
सामग्री विक्रय प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया ।
*हरि शंकर साहू फार्मासिस्ट जिसकी पोस्टिंग जिला कार्यालय के स्टोर में है को cmho द्वारा अनाधिकृत chc बिल्हा में कार्य संपादन कराया जा रहा है द्वारा निखिल सिंह राजपूत को सामग्री विक्रय करने का प्रमाणपत्र जारी किया गया है* जिसे कोई अधिकार ही नहीं था ।
न तो सामग्री परीक्षण समिति का गठन किया गया और न ही समिति ने सामग्रियों का मूल्यांकन किया ।
रात के अंधेरे में भ्रष्टाचारियों की विशेष निगरानी में ट्रक में उपकरण सामग्री लोड कराया जाता है तत्कालीन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उक्त ट्रक में संचालित हो रहे उपकरण एवं उपयोग में आ रहे सामग्रियों को भी डाला गया था जिसकी वर्तमान किमत लाखों में थी। सामग्री से लदे ट्रक को रात 12 बजे के बाद अस्पताल परिसर से निकासी कराई जाती है । जिसका समाचार पत्र में फोटो सहित समाचार प्रकाशन भी हुआ था
बदले में निखिल सिंह राजपूत द्वारा 20276= 00 ट्रक में भरे उपकरण सामग्री की कीमत दी जाती है। उक्त राशि शासन के कोष में जमा न कराके जीवनदीप समिति खाता में जमा कराया जाता है जिसे बाद में फर्जी खर्च बिल लगा कर निकाल लिया जाता है
अवैध तरीके से साजिश के तहत विभाग को क्षति पहुंचाते खुद अनाधिकृत लाभ लेने की नियत रखते हुए उक्त संपादित कराए गए कंडम प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कमेटी से जांच कराया जाना चाहिए।
जिस फार्मासिस्ट को संलग्नीकरण कर रखा गया था। जिसका संलग्नीकरण समाप्त हो चुका है जिसकी कंडमनेशन में अहम भूमिका है ,आज भी बिल्हा में क्यों कार्य कर रहा है?
क्या cmho का संरक्षण प्राप्त है?
क्या cmho हर उन कर्मचारियों ,चिकित्सकों को संरक्षण दे रहे हैं जो नियम विरुद्ध कार्य करने में दक्ष है?
संरक्षण देने की असली वजह क्या है?
कहीं अवैध धन उगाही की साजिश तो नहीं?
*अब देखना ये है कि क्या cmho द्वारा बिल्हा CHC स्टोर की स्थाई उपकरण सामग्री की स्टॉक रजिस्टर अस्थाई उपकरण सामग्री की स्टॉक रजिस्टर सहित वितरण रजिस्टर की जांच कराने की हिम्मत जुटा पाएंगे?*
यदि उक्त प्रकरण को cmho द्वारा गंभीरता से नहीं लिया जाता है तो स्पष्ट हो जाएगा कि cmho की भूमिका भी संदिग्ध है।।
