

डेस्क खबर बिलासपुर../ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पेट भरने के गरीबों के लिए आवंटित सरकारी चावल की कथित हेराफेरी का एक वीडियो सामने आने के बाद खाद्य विभाग और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वीडियो सरकंडा क्षेत्र के मुक्तिधाम के आसपास का दोपहर करीब 3 बजे सोमवार का बताया जा रहा है। इसमें त्रिपाल से ढकी एक गाड़ी के भीतर चावल की बोरियां और आसपास कुछ हमाल नजर आ रहे हैं।
वीडियो बनाने वाले व्यक्ति के सामने आते ही गाड़ी का चालक कथित तौर पर हड़बड़ा गया और वाहन को तेजी से वहां से ले जाता दिखाई दे रहा है। वीडियो में वाहन का नंबर भी नजर भी स्पष्ट नजर आ रहा है। हालांकि, वाहन किस ट्रांसपोर्टर के नाम पर है और उसमें लदा चावल कहां से आया था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह वाहन सरकारी चावल के परिवहन में लगा था, तो वह इस स्थान पर किस उद्देश्य से पहुंचा था? क्या चावल निर्धारित राशन दुकानों तक पहुंचाया जा रहा था या रास्ते में ही इसकी हेराफेरी की जा रही थी?
स्थानीय स्तर पर पहले भी सरकारी चावल के बदले नकद भुगतान और परिवहन के दौरान चावल की कथित चोरी के आरोप और पुख्ता वीडियो सामने आते रहते है ।अब सामने आए वीडियो ने इन दावों की जांच की जरूरत और बढ़ा दी है।
GPS निगरानी के बावजूद कैसे निकल रहा चावल?
सरकारी चावल के परिवहन में लगे वाहनों की आवाजाही GPS के जरिए ट्रैक किए जाने की व्यवस्था है। ऐसे में सवाल है कि वाहन की लोकेशन, रूट और गंतव्य की जांच की जाए तो क्या पूरी तस्वीर सामने आ सकती है?

अब खाद्य विभाग और जिला प्रशासन के सामने कई सवाल हैं—वाहन किसके नाम पर है? चावल किस गोदाम से लोड हुआ था? किस राशन दुकान के लिए आवंटित था? GPS रिकॉर्ड में वाहन की लोकेशन क्या थी? और वीडियो में नजर आ रही बोरियों का वास्तविक स्रोत क्या है? वीडियो की सत्यता और चावल के स्रोत की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन गरीबों के हक के सरकारी राशन से जुड़ा मामला होने के कारण वाहन नंबर, GPS रिकॉर्ड, लोडिंग दस्तावेज और मौके पर मौजूद लोगों की पहचान की जांच बेहद अहम मानी जा रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर त्रिपाल के अंदर चावल का क्या खेल चल रहा था और सबसे बड़ा सवाल क्या इस गाड़ी के मालिक को और ट्रांसपोर्टर की इसमें अहम भूमिका है ??

