महामाया मंदिर विवाद में BJP का एक्शन, बीजेपी नेत्री रेहाना बेगम पद से मुक्त, SC-ST एक्ट में FIR के बाद सियासी गर्मी , मंदिर ट्रस्ट ने 4 दुकानों को हटाने भेजा नोटिस दिया अल्टीमेटम

डेस्क खबर बिलासपुर../ जिले की धार्मिक नगरी रतनपुर के प्रसिद्ध महामाया मंदिर परिसर में हुए विवाद ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर हलचल बढ़ा दी है। विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस एफआईआर से लेकर भाजपा संगठन की कार्रवाई और मंदिर ट्रस्ट के नोटिस तक मामला पहुंच गया है।भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा मंडल रतनपुर की महामंत्री रेहाना बेगम को पार्टी ने तत्काल प्रभाव से पद से मुक्त कर दिया है। रतनपुर थाने में उनके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होने के बाद संगठन ने यह कदम उठाया है। भाजपा ग्रामीण जिला संगठन की ओर से कहा गया है कि पुलिस जांच पूरी होने तक यह कार्रवाई प्रभावी रहेगी।

वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि 22 अगस्त को महामाया मंदिर परिसर में रेहाना बेगम और एक अन्य व्यक्ति के बीच विवाद हुआ था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा। शिकायत के आधार पर पुलिस ने रेहाना बेगम के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
भाजपा संगठन का तर्क है कि चूंकि मामले में पुलिस जांच चल रही है, इसलिए संगठनात्मक पद पर बने रहने से जांच प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उन्हें जिम्मेदारी से मुक्त किया गया है। पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे निर्णय लेने की बात भी संगठन ने कही है।

दूसरे पक्ष की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं होता। विवाद में दूसरे पक्ष की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब पूरे विवाद में दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं, तो संगठनात्मक कार्रवाई केवल एक पक्ष पर ही क्यों हुई?
दूसरे पक्ष से जुड़े लोगों पर लगाए गए आरोपों और एक भाजपा पदाधिकारी की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि जांच में आखिर किसकी भूमिका कितनी सामने आती है।
महामाया ट्रस्ट भी सख्त—चार दुकानों को हटाने का आदेश
उधर, विवाद के बाद महामाया मंदिर ट्रस्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ट्रस्ट की ओर से जारी आदेश में मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचने और मंदिर परिसर का माहौल प्रभावित होने का हवाला देते हुए चार दुकानदारों को दुकानें तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है।
ट्रस्ट के आदेश में भागवत उर्फ राहुल पटेल की महामाया फ्लावर दुकान, ईश्वर प्रधान, चिकी प्रधान और राजू शर्मा की गीता प्रेस पुस्तक दुकान का उल्लेख किया गया है। आदेश में दुकानें नहीं हटाने पर बलपूर्वक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
एक तरफ एफआईआर के बाद भाजपा ने अपने पदाधिकारी को पद से मुक्त कर दिया, दूसरी तरफ मंदिर ट्रस्ट ने विवाद से जुड़े दुकानदारों को परिसर खाली करने का निर्देश दे दिया।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है—क्या कार्रवाई सभी पक्षों की भूमिका सामने आने के बाद समान रूप से होगी? क्या पुलिस जांच में दूसरे पक्ष की भूमिका भी सामने आती है? और अगर आती है तो क्या भाजपा संगठन उस पर भी इसी तरह का एक्शन लेगा? अब मामले में पुलिस जांच महत्वपूर्ण हो गई है। जांच में विवाद की शुरुआत कैसे हुई, दोनों पक्षों की भूमिका क्या रही और घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ—इन सभी बिंदुओं पर पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। महामाया मंदिर जैसे धार्मिक स्थल से जुड़े विवाद में एक ओर भाजपा की संगठनात्मक कार्रवाई और दूसरी ओर मंदिर ट्रस्ट के नोटिस ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब पुलिस जांच की रिपोर्ट से ही तय होगा कि विवाद में किसकी भूमिका क्या रही और आगे किन लोगों पर कार्रवाई होती है।
