

डेस्क खबर बिलासपुर ../ गरीबों की भूख मिटाने और पेट भरने के लिए सरकार द्वारा वितरित सरकारी चावल बिलासपुर जिले में स्थित राइस मिलो में खपाया जा रहा है । शहर से गाड़ियों में लादकर सरकारी चावल जिले के रतनपुर ,बिल्हा तखतपुर सिरगिट्टी सहित कई राइस मिलो में पहुंचाया जा रहा है । शहर के सड़को में चावल की लदी गाड़ियों बेखौफ होकर खाद्य विभाग के संरक्षण में पहुंच रही है ,भौतिक सत्यापन के नाम पर विभाग के अधिकारियों द्वारा वसूली की खबर भी विभाग में चर्चा का विषय बनी हुई है । ऐसा भी नहीं है कि इस बात की जानकारी खाद्य विभाग को नहीं है लेकिन विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए है और तमाम शिकायतों के बाद भी कार्यवाही से बच रहे है । नियम के अनुसार राइस मिलो में सरकारी चावल खरीदना पूरी तरह बैन है लेकिन गाड़ियों में भर भर के चावल खपाने का खेल दिन दहाड़े चल रहा है । ऐसी ही कई गाड़ियां कैमरे में भी कैद हो चुकी है ।




गौरतलब है कि बिलासपुर जिले के शहरी और ग्रामीणों क्षेत्रों में 600 से ज्यादा राशन दुकान संचालित की जा रही है और अधिकांश दुकानों में सरकारी चावल के बदले नगद पैसा देने की परम्परा का खुलेआम पालन किया जा रहा है, और राशन दुकानदार गरीबों को दिए जाने वाले चावल को एकत्रित कर राइस मिलो में भेजकर जमकर मुनाफाखोरी और कालाबाजारी कर रहे है । कस्टम मिलिंग के नाम पर यही चावल दुबारा मार्केट सहित सरकारी गोदामों में पहुंच रहा है ।

नाम न छापने की शर्त में दुकानदारों ने बताया कि इस खेल में दलालो की भूमिका सक्रिय रहती है और जिले में अलग अलग दलाल की राइस मिल के संचालकों से तगड़ी सेटिंग है । और खपत के नाम पर दाम तय किए जाते है इसलिए अब 20 रु का सरकारी चावल इस समय 23 रु से 24 रु तक पहुंच चुका है और मुनाफा भी कम हो गया है । सूत्रों का यहां तक दावा किया जा रहा है कि खाद्य विभाग के अधिकारियों से राइस मिलो के संचालक से कार्यवाही नहीं होने के एवज में वसूली भी की जाती है जिसके चलते अधिकांश राइस मिलो में सरकारी चावल से लदी गाड़ियों साफ साफ देखी भी जा सकती है । सूत्र तो यहाँ तक दावा करते है कि राजनैतिक और विभागीय आयोजन के नाम पर भी सरकारी राशन दुकानों सहित राइस मिलो से सहयोग के नाम पर एक निश्चित राशि की वसूली की जाती है ।
बिलासपुर जिले में सरकारी पीडीएस चावल की कथित कालाबाजारी और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चावल की हेराफेरी की जानकारी विभाग को होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही। कलेक्टोरेट परिसर स्थित खाद्य विभाग हाल के दिनों में लगातार सुर्खियों में है। मस्तूरी क्षेत्र में पदस्थ एक फूड इंस्पेक्टर को एसीबी ने शिकायत के बाद नोटों के साथ रंगे हाथो गिरफ्तारी के बाद से विभागीय कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि यह मामला शिकायत और कार्रवाई के बाद सामने आया, लेकिन यह बहस तेज है कि विभाग में ऐसे कितने लोग सक्रिय हैं जो बिना शोर-शराबे के भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

इधर, गरीबों के लिए निर्धारित पीडीएस चावल की कथित अवैध खरीद-फरोख्त को लेकर भी प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नेटवर्क को विभागीय और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर पर भी कार्रवाई में देरी और ऋषि उपाध्याय को खुला संरक्षण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न किए जाने और संबंधित उचित मूल्य दुकान की रिपोर्ट पर कार्यवाही की अनुशंसा नहीं करने को लेकर खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर मीडिया में चर्चा में है ।
