


डेस्क खबर ./ छत्तीसगढ़ में लगातार रेलवे की लापरवाही और रेल यात्रियों की सुरक्षा की अनदेखी के चलते जनता जान हथेली में लेकर रेल सफर करने को मजबूर है। रेलवे कहता है सफर सुरक्षित है, लेकिन ये तस्वीरें बता रही हैं कि यात्री हर दिन मौत को मात देकर मंजिल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। रेल यात्रा का एक वायरल वीडियो रेलवे के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है आप इस वायरल वीडियो में देख सकते है कि डब्बों की कमी के चलते जनता डब्बों के अंदर किस तरह सफ़र करने के लिए मजबूर है इतना ही नहीं अंदर जगह नहीं मिलने के कारण लोग अपनी जिंदगी दांव में लगकर चलती गाड़ियों में दरवाजे के बाहर लटकर अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए बेबस नजर आ रहे है।
ताजा मामला बालोद जिले का बताया जा रहा है जहां से रेलवे व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। अंतागढ़ से बालोद होते हुए रायपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में यात्रियों की भारी भीड़ और बोगियों की कमी के कारण लोग रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने रेलवे की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दल्लीराजहरा पहुंचने से पहले ही ट्रेन पूरी तरह खचाखच भर चुकी है। हालत यह है कि दर्जनों यात्री ट्रेन के दरवाजों पर लटककर यात्रा कर रहे हैं, जबकि बोगियों के अंदर पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। कई यात्री भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंसकर सफर करने को मजबूर हैं।रेल परियोजना के तहत ताड़ोकी तक रेल सेवा का विस्तार बस्तर अंचल के लिए भले ही एक उपलब्धि माना जा रहा हो, लेकिन बालोद जिले के यात्रियों के लिए यह सुविधा अब परेशानी का कारण बनती जा रही है। यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन बोगियों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं की गई है।स्थानीय जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों द्वारा क्षेत्रीय सांसद एवं रेलवे के डीआरएम को कई बार ज्ञापन सौंपकर ट्रेन में अतिरिक्त बोगियां जोड़ने की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। नतीजतन यात्रियों को मजबूरी में ट्रेन के गेट पर लटककर और जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।लगातार ट्रेनों के रद्द होने और सीमित संसाधनों का असर भी अब साफ दिखाई देने लगा है। रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और सुरक्षित यात्रा के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन वायरल वीडियो इन दावों की हकीकत बयां कर रहे हैं। जरा सी चूक या हादसा कई परिवारों की खुशियां छीन सकता है, इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की उदासीनता बनी हुई है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रेलवे किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या फिर यात्रियों की सुरक्षा के लिए समय रहते कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे? फिलहाल हजारों यात्रियों की रोजमर्रा की यात्रा किसी सुविधा से कम और जोखिम भरे संघर्ष से ज्यादा नजर आ रही है।