डेस्क खबरबिलासपुर

गुरु ने ही तोड़ी मर्यादा, शिक्षा जगत को किया कलंकित ..नाबालिक छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में शिक्षक गिरफ्तार, SSP की फटकार के बाद दर्ज हुई FIR !!




डेस्क खबर बिलासपुर…/ .गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा को शर्मसार करने वाला मामला बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र से सामने आया है। एक निजी स्कूल के शिक्षक पर अपनी ही 15 वर्षीय छात्रा को बहला-फुसलाकर होटल ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगा है। मामले में पुलिस की शुरुआती लापरवाही और स्कूल प्रबंधन की कथित संवेदनहीनता भी सवालों के घेरे में आ गई है। जानकारी के अनुसार घटना दिसंबर 2025 की बताई जा रही है। आरोप है कि निजी स्कूल में पदस्थ शिक्षक राहुल बंगारु छात्रा को किताब दिलाने के बहाने होटल ले गया, जहां उसने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने घटना के बारे में किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।
डर और मानसिक दबाव में रह रही छात्रा ने परीक्षा समाप्त होने के बाद टीसी लेने के दौरान हिम्मत जुटाकर स्कूल के प्राचार्य और अन्य शिक्षकों को पूरी घटना की जानकारी दी। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे नजरअंदाज कर दिया।इसके बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को आपबीती बताई। परिजन शिकायत लेकर सिरगिट्टी थाना पहुंचे, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने अधिकार क्षेत्र का हवाला देकर एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें दिनभर इधर-उधर भटकाया।परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार घटनास्थल के नाम पर नाबलिक छात्रा को इस थाने से लेकर उस थाने तक घुमाते रहे किसी तरह इस गंभीर मामले की सूचना बिलासपुर पुलिस कप्तान तक पहुंची जिसके बाद तत्काल उन्होंने मामले पर तत्काल थाना प्रभारी को फटकार लगाते हुए पूरे मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जिसके बाद पुलिस ने मामले में आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है।

शिक्षा जगत को शर्मशार करने वाला यह यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि उस भरोसे की परीक्षा है जिसके साथ माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं। जब एक नाबालिग की शिकायत पर कार्रवाई में देरी के आरोप लगते हैं, तो यह केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल बन जाता है। इस शर्मनाक कांड के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल उठना लाजमी है कि क्या एक नाबालिग बच्ची छात्रा को न्याय पाने के लिए थानों के चक्कर काटने चाहिए था ? क्या बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में कानून की संवेदनशीलता अब भी कागजों तक सीमित है? और अगर वरिष्ठ अधिकारियों का हस्तक्षेप न होता, तो क्या यह मामला भी फाइलों में दब जाता?

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