


डेस्क खबर बिलासपुर ./ जिले की धार्मिक नगरी रतनपुर में इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुंची एक महिला की ऑपरेशन के बाद मौत हो जाने से हडकम्प मच गया,परिजनों का आरोप है कि सरकारी महिला डॉक्टर की लापरवाही के चलते महिला की मौत हुई है। महिला की मौत के बाद परिजनों ने रतनपुर स्थित मातृका नर्सिंग होम और वहां पदस्थ चिकित्सक डॉ. नेहल झा पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए रतनपुर पुलिस से।महिला डाक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है ।


परिजनों के आरोपों के अनुसार 50 वर्षीय महिला के बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए वे जब रतनपुर के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो सरकारी अस्पताल में पदस्थ महिला प्रसूति विशेषज्ञ डॉ नेहल झा ने जांच के बाद परिजनों को सरकारी अस्पताल से करीब एक किलोमिटर दूर अपने निजी नर्सिंग होम रतनपुर के एक निजी मातृका नर्सिंग होम में आकर आपरेशन करवाने की बात कही। महिला विशेषज्ञ डॉक्टर पर भरोसा कर सरकारी अस्पताल की बजाय उसके निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया और इलाज के लिए 15 हजार रु भी जमा किए ।

में बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए भर्ती कराई गई महिला की मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सक पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। घटना के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया है और जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पोड़ी नवागांव निवासी 50 वर्षीय कुमारी बाई साहू को बच्चेदानी संबंधी इलाज का शनिवार को निजी नर्सिंग होम में ऑपरेशन किया गया। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन शुरू होने के करीब एक घंटे बाद डॉक्टर ने महिला की हालत बिगड़ने और ब्लड प्रेशर कम होने की जानकारी दी तथा उसे तत्काल बिलासपुर के सिम्स अस्पताल रेफर कर दिया गया। लेकिन सिम्स पहुंचने पर महिला को मृत घोषित कर दिया गया।

घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका आरोप है कि इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई और रेफरल से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज जब्त करने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रतनपुर पुलिस ने अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ले ली है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगा।

फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि की क्या सरकारी अस्पताल में पदस्थ महिला डॉक्टर ने खुद के निजी अस्पताल में प्रैक्टिस की विभागीय अनुमति ली हुई है?और क्या उनका मातृका नर्सिंग होम सरकारी स्वास्थ्य विभागों नियमों के अनुरूप चल रहा है ? और सबसे बड़ा सवाल क्या महिला डॉक्टर सरकारी अस्पताल में आपरेशन करवाने और मरीजों का इलाज अपने खुद के नर्सिंग होम में कर सकती है ।
फिलहाल इस मामले महिला डॉक्टर का कोई पक्ष नहीं मिल पाया है उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी अस्पताल में आपरेशन के दौरान महिला डॉक्टर के निजी अस्पताल में हुई मौत पर परिजनों के आरोपों को जिले के जिम्मेदार अधिकारी गंभीरता से लेते हुए महिला की मौत के साथ मातृका नर्सिंग होम संचालन की अनुमति से संबंधी मामले की भी गंभीर और कागजी जांच करेंगे।