
डेस्क खबर बिलासपुर ./ बिलासपुर जिले में हर साल गर्मी से पहले जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समीक्षा बैठकों का दौर चलता है। अधिकारी दिशा-निर्देश जारी करते हैं, योजनाओं की घोषणा होती है और अखबारों में सुर्खियां बनती हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। बिलासपुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित सीपत गांव आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रहा है। जिसके कारण रहवासियों का जीवन बदहाल है


यह वही क्षेत्र है जहां देश की प्रमुख विद्युत कंपनी NTPC का थर्मल पावर प्लांट स्थापित है। उद्योगों की चिमनियां धुआं उगल रही हैं, फैक्ट्रियां चल रही हैं, लेकिन गांव के लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। हजारों किसानों की जमीन परियोजना के लिए ली गई, रोजगार और विकास के वादे किए गए, पर आज ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं भी नसीब नहीं हैं। NTPC प्रबंधन की लापरवाही और मनमानी के कारण सीपत में रहने वाले परिवारों का जीवन नर्क बनता जा रहा है तमाम शिकायतों के बाद भी जिला प्रशासन और चुने हुए जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बने बैठे हुए है ।


सीपत बस स्टैंड पर NTPC द्वारा CSR मद से स्थापित RO प्लांट, जिसका उद्घाटन वर्ष 2015 में हुआ था, पिछले कई वर्षों से बंद पड़ा है। शुरुआत में दो-तीन साल तक ही लोगों को इसका लाभ मिल सका, उसके बाद से प्लांट निष्क्रिय है। गर्मी का मौसम दस्तक दे चुका है, लेकिन पेयजल संकट जस का तस बना हुआ है। प्लांट के बंद पड़े रहने के चलते गरीब किसानों और मजदूरी कर अपना जीवन यापन करने वालो आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है ।


ग्रामीणों का आरोप है कि जल प्रदूषण के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं, फिर भी जल संसाधन विभाग और जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं। बैठकों और घोषणाओं के बीच आम जनता का जीवन नारकीय होता जा रहा है। सवाल यह है कि क्या विकास की कीमत ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन से चुकाई जाएगी, या फिर जिम्मेदार विभाग समय रहते इस गंभीर समस्या पर ठोस कार्रवाई करेंगे? NTPC की परियोजना के चलते पहले ही प्रभावित गांव जल संकट और प्रदूषित पानी के चलते गंभीर बीमारियों से जूझ रहे है वावजूद उसके जिम्मेदार आँख मूंद कर बैठे है