डेस्क खबरबिलासपुर

पार्ट–39: राशन घोटाला – 38 एपिसोड के बाद भी बेखौफ सिस्टम, आखिर किसके संरक्षण में बच रहे आरोपी.? वीडियो सामने आने के बाद भी FIR नहीं.! आईडी 401001096 का ऋषि उपाध्याय है चावल चोरों का अध्यक्ष !!



डेस्क खबर बिलासपुर../ बिलासपुर जिले में सरकारी राशन घोटाले का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बहुचर्चित घोटाले का यह 33वां एपिसोड है, और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लगातार 38 एपिसोड और कई वीडियो सामने आने के बावजूद अब तक न तो बड़ी आपराधिक कार्रवाई हुई है और न ही मुख्य आरोपियों पर FIR दर्ज की गई है। इससे न केवल खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि यह भी संदेह गहराता जा रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में चल है यह पूरा खेल
ताजा मामला बिलासपुर के हेमूनगर, वार्ड क्रमांक 45 स्थित श्री साईंराम खाद्य सुरक्षा पोषण एवं सेवा सहकारी समिति मर्यादित का है, जहां दुकानदार को सरकारी चावल देने के बजाय हितग्राहियों को नगद राशि देते हुए मोबाइल कैमरे में कैद किया गया है। यह वीडियो सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जिले में राशन के बदले नगद देकर चावल की कालाबाजारी का नेटवर्क अब भी सक्रिय है। इस बार कैमरे में कैद हुआ चावल चोर दुकान संचालक का पुत्र बताया जा रहा है जो कि दुकान संचालक अपने पिता के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने से अब खुद सरकारी राशन के बदले खुद नगद पैसा देते हुए कैमरे में कैद हो गया ।



38 एपिसोड के बाद भी कार्रवाई नहीं – क्या यह प्रभाव और संरक्षण का परिणाम?
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि जब इस घोटाले के लगातार 32 एपिसोड, वीडियो प्रमाण और जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, तब भी बड़े प्रशासनिक अधिकारी और सत्ता में बैठे जिम्मेदार लोगों की नजर इन मामलों पर क्यों नहीं गई?
क्या यह केवल विभागीय लापरवाही है या फिर इसके पीछे कोई प्रभावशाली संरक्षण काम कर रहा है?
वीडियो सामने आने, शिकायतें होने और जांच में आरोप प्रमाणित होने के बावजूद FIR दर्ज न होना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं सिस्टम की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि यही अपराध कोई आम व्यक्ति करता, तो क्या अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो जाती?
मगरपारा राशन दुकान मामला – जांच सही, निलंबन हुआ, लेकिन FIR अब भी नहीं


विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय की मगरपारा स्थित राशन दुकान (आईडी 401001096) में 07 जून 2025 को खाद्य विभाग की जांच में अनियमितताएं प्रमाणित पाई गई थीं। हितग्राहियों से चावल के बदले नगद राशि लेने का मामला स्पष्ट रूप से सामने आया था।
इसके बाद 30 जुलाई 2025 को कलेक्टर कार्यालय की खाद्य शाखा ने दुकान को निलंबित कर दिया और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा भी की गई।
लेकिन जांच रिपोर्ट, वीडियो प्रमाण और अनुशंसा के बावजूद आज तक FIR दर्ज नहीं होना पूरे सिस्टम की निष्क्रियता या दबाव में काम करने की आशंका को मजबूत करता है।
खाद्य अधिकारी अमित कुजूर की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे गंभीर सवाल


जिले में लगातार सामने आ रहे वीडियो और प्रमाण के बावजूद खाद्य विभाग की ओर से आपराधिक कार्रवाई न होना खाद्य अधिकारी अमित कुजूर की भूमिका को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा है।
खाद्य अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह राशन व्यवस्था में पारदर्शिता और कानून का पालन सुनिश्चित करें। लेकिन बार-बार वीडियो सामने आने और जांच में आरोप सही पाए जाने के बावजूद FIR दर्ज न होना यह संकेत दे रहा है कि या तो विभाग कार्रवाई करने में असमर्थ है, या फिर जानबूझकर कार्रवाई से बचा जा रहा है।
क्या वीडियो और प्रमाण भी कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं?
अब सवाल यह उठ रहा है कि—
जब वीडियो में स्पष्ट रूप से नगद लेन-देन दिखाई दे रहा है,
जब जांच रिपोर्ट में आरोप प्रमाणित हो चुके हैं,
जब प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा भी हो चुकी है,
तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?
क्या यह देरी प्रशासनिक विफलता है, या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव का परिणाम?



गरीबों के हक पर डाका, सिस्टम की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

सरकारी राशन गरीबों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सहारा है। लेकिन यदि इस व्यवस्था में बैठे जिम्मेदार लोग ही कालाबाजारी और भ्रष्टाचार में शामिल पाए जाएं और फिर भी उन पर कार्रवाई न हो, तो यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।

लगातार 32 एपिसोड और अब 33वें वीडियो के सामने आने के बाद भी यदि दोषियों पर FIR दर्ज नहीं होती, तो यह न केवल सिस्टम की कमजोरी बल्कि प्रभावशाली संरक्षण की आशंका को भी दर्शाता है।
अब जनता और शासन के सामने सीधा सवाल
क्या प्रशासन इस मामले में FIR दर्ज कर दोषियों को गिरफ्तार करेगा?



क्या खाद्य अधिकारी अमित कुजूर की भूमिका की भी जांच होगी?

क्या विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी प्रभाव और संरक्षण के कारण फाइलों में दबा दिया जाएगा?

फिलहाल, पूरे जिले की जनता और हितग्राही शासन और प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन गरीबों के हक की रक्षा करता है या फिर भ्रष्टाचार का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।

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