डेस्क खबरबिलासपुर

न्यायधानी का मेला, सड़क और मौत: आखिर कब जागेगा सिस्टम? घंटों अस्पताल में इलाज नहीं मिलने से गरीब युवक की मौत ! बिलासपुर एसएसपी के तत्कालीन मदद से भी नहीं बच पाई जान .! देखिये सिस्टम का काला सच वीडियो और परिजनों की जुबानी सुनिये पूरी कहानी !!



डेस्क खबर बिलासपुर ../ प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर के सीपत स्वास्थ्य केंद्र में सिस्टम की लापरवाही से एक युवक की मौत हो गई । सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल दो युवकों को घंटों सीपत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज नहीं मिलने से एक युवक को अधिक रक्त रिसाव के चलते बीच रास्ते मौत की नींद सुला दी । मिली जानकारी के अनुसार सीपत के में ग्राम कौड़िया में महाशिवरात्रि पर हर वर्ष लगने वाले तीन दिवसीय मेले में हजारों श्रद्धालु भोले बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं



इसी कड़ी में गांव जांजी के अमन सोनवानी अपने परिवार के साथ कौड़िया की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे वाहन से टक्कर हो गई। बताया गया कि पीपर शक्ति गांव के मोहन पल भी इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए। तत्काल किसी तरह घायल युवकों को सीपत के सरकारी अस्पताल लाया भी गया । परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार दोनों युवक गंभीर अवस्था में सरकारी अस्पताल में घंटों अस्पताल परिसर में गाड़ी में पड़े रहे लेकिन अस्पताल में स्टाफ नहीं होने से उन्हें घंटों इलाज नहीं मिल पाया और ना ही रेफर करने के लिए कोई एंबुलेंस आई । इस मामले का वीडियो भी किसी ने बनाकर मीडिया तक पहुंचाया ।



वीडियो में घायल युवक के परिजन और तस्वीरें सिस्टम का पूरे काले सच की पोल खोलने के लिए काफी है कि किस तरह एक गरीब युवक को समय में सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई । परिजनों का कहना है कि उस वक़्त अस्पताल में दो महिला स्टाफ और पुलिसकर्मी मौजूद थी लेकिन उन्होंने तत्काल इलाज के दिलाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई । घंटों तक गंभीर अवस्था में युवकों के बारे में जब मीडिया के माध्यम से हादसे की सूचना बिलासपुर एसएसपी को मिलते ही तत्काल अस्पताल में एंबुलेंस भी मदद के लिए पहुंची लेकिन एसएसपी के तत्काल मदद के सराहनीय प्रयास के बाद भी एक युवक ने इलाज में देरी में अधिक खून गिरने के कारण दम तोड़ दिया ।




सिस्टम की लापरवाही के चलते एक गरीब युवक की मौत के बाद सवाल यह नहीं कि कौन गिरा और किसे चोट आई—सवाल यह है कि इतने भीड़भाड़ वाले आयोजन में सुरक्षा प्रबंधन और आपातकालीन प्राथमिक उपचार की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या प्रशासन ने ट्रैफिक नियंत्रण, एंबुलेंस और मेडिकल टीम की पूर्व व्यवस्था की थी? कुछ दिन पहले सीपत मुख्य मार्ग पर तेज रफ्तार ट्रक ने एक दोपहिया चालक की जान ले ली। वह रोज की तरह काम पर निकला था, पर लौटकर घर नहीं आया। ये घटनाएं महज हादसे नहीं, चेतावनी हैं। जब तक भीड़ प्रबंधन, सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक ऐसी त्रासदियां दोहराई जाती रहेंगी।



अब दुर्घटनाओं की कीमत आम आदमी की जान से चुकाई जाएगी? सड़क पर निकलते समय अब सिर्फ ट्रैफिक का नहीं, सिस्टम की लापरवाही का भी डर सताने लगा । भीड़ उमड़ती है, लेकिन क्या व्यवस्था भी उतनी ही मुस्तैद रहती है? जांच और मुआवज़ा पर्याप्त नहीं। जरूरत है जवाबदेही की—ताकि अगली सुबह कोई घर अपने अपनों का इंतजार करते हुए खाली न रह जाए। और सबसे बड़ा सवाल  यह है कि युवक की मौत का असली दोषी कौन है सिस्टम या अस्पताल में मौजूद मेडिकल स्टाफ या फिर मौजूद पुलिसकर्मी .?? अब देखना होगा कि असली दोषियों पर कब और क्या कार्यवाही होती है ताकि सिस्टम की लापरवाही से किसी और गरीब की मौत ना हो पाये ।

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