डेस्क खबरबिलासपुर

न्यायधानी में राष्ट्रीय पर्व पर बड़ी प्रशासनिक चूक: तिरंगे की गरिमा से खिलवाड़, कौन है जिम्मेदार? आखिर क्यों है जिम्मेदार मौन .?? आखिर क्या कहता है राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम !!

Ads
Ads


डेस्क खबर बिलासपुर ../ प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर में राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर जहां एक ओर देशभक्ति और सम्मान का वातावरण होना चाहिए था, वहीं दूसरी ओर तिरंगे की गरिमा से जुड़े गंभीर मामले सामने आए हैं। सोशल मीडिया से लेकर मीडिया संस्थान  की सुर्खियों तक तिरंगे के कथित अपमान ने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार  राशि स्टील प्लांट परिसर में ध्वजारोहण के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने के दौरान रस्सी टूटने की वजह से जमीन पर गिरा हुआ पाया गया जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया में जमकर वायरल भी हुआ लेकिन तिरंगे के अपमान पर प्रशासनिक अनदेखी के चलते अभी तक कार्यवाही नहीं हो पाई है ।



वहीं पुलिस ग्राउंड में मुख्यमंत्री के ध्वजारोहण के ठीक कुछ घंटे पहले तिरंगे को तकिए की तरह इस्तेमाल किए जाने का दृश्य भी कैमरे में कैद हो चुका है , जो कि घोर लापरवाही दिखाती है जिसके बाद भी जिम्मेदारों  के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने से सवाल उठना लाजमी है आखिर तिरंगे के अपमान के बाद भी राष्ट्रीय ध्वज संहिता का पालन आखिर क्यों नहीं हुआ.??



तिरंगा अपमान मामले में कांग्रेस का ज्ञापन, सख्त कार्रवाई की मांग
26 जनवरी को तिरंगे के अपमान के मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने तहसीलदार मस्तूरी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
इस दौरान कांग्रेस नेता व जनपद सदस्य देवेंद्र कृष्णन, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष भोला राम साहू, एनएसयूआई के राष्ट्रीय पदाधिकारी राहुल राय, युवक कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष साहिल मधुकर, ऋतू भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि तिरंगे का अपमान देश का अपमान है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को इन घटनाओं की जानकारी होने के बावजूद कोई त्वरित कार्रवाई सामने नहीं आई। जानकर भी अनजान बने रहने का यह रवैया प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तिरंगे के अपमान के इस मामले में संज्ञान कौन लेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? राष्ट्रीय ध्वज केवल कपड़ा नहीं, बल्कि देश के सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है। ऐसे में लापरवाही को नजरअंदाज करना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।

जबकि कानून कहता है भारतीय तिरंगे का अपमान करना, जैसे उसे जलाना, फाड़ना, या जमीन पर गिराना, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। इसके लिए दोषी को 3 साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। यह एक संज्ञेय अपराध (cognizable offence) है।
मुख्य कानूनी प्रावधान:
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Section 2): सार्वजनिक रूप से झंडे का अनादर करने पर सजा।
भारतीय ध्वज संहिता, 2002: यह तिरंगे को फहराने और इस्तेमाल करने के नियम बताती है, जिनका पालन न करने पर भी कानूनी कार्यवाही हो सकती है।
अपमान के उदाहरण: झंडे को उल्टा फहराना, गंदा होना, जमीन छूना, या कपड़ों के रूप में पहनना।
पुलिस कार्यवाही: पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है।
तिरंगे का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है और तिरंगे का सम्मान करवाना हर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी ।

error: Content is protected !!