डेस्क खबरबिलासपुर

खसरा 275/2 बनाम 277 विवाद: तीसरी बार सीमांकन, राजस्व विभाग पर सवाल




डेस्क खबर बिलासपुर ../ जूना बिलासपुर हल्का अंतर्गत करबला कोदू चौक के पास स्थित भूमि को लेकर खसरा नंबर 275/2 और 277 के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि एक ही भूमि का दो बार विधिवत सीमांकन और एक बार दल सीमांकन हो जाने के बावजूद राजस्व विभाग तीसरी बार फिर से सीमांकन कराने जा रहा है। सोमवार को तहसीलदार के निर्देश पर रिकॉर्ड तीसरी बार टीम सीमांकन किया जाएगा।

यह पूरा मामला भू-स्वामी शिव प्रताप साव की भूमि खसरा नंबर 275/2 से जुड़ा है। उन्होंने अपनी भूमि के सीमांकन के लिए तहसील कार्यालय बिलासपुर में आवेदन किया था। इसके बाद राजस्व निरीक्षक द्वारा 24 जून 2025 की तिथि तय की गई। नियमानुसार दैनिक अखबार में आम सूचना प्रकाशित कराई गई और सीमावर्ती भू-स्वामियों को नोटिस तामील कराई गई। तय तिथि पर आरआई और जूना बिलासपुर के पटवारी ने मौके पर पहुंचकर सीमांकन किया।इस सीमांकन से असंतुष्ट होकर पास के खसरा नंबर 277 के भू-स्वामी चिमन दास रावलानी ने तहसील में आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद तहसीलदार ने दल सीमांकन के आदेश दिए। 10 जून 2025 को जारी आदेश में दो आरआई और चार पटवारियों की टीम गठित की गई। पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए दोबारा अखबार में सूचना प्रकाशित कराई गई, कोटवार के माध्यम से नोटिस चस्पा कराया गया और पुलिस बल की मौजूदगी में दल सीमांकन किया गया। हंगामे के प्रयासों के बावजूद टीम ने सीमांकन पूरा कर रिपोर्ट तहसील कार्यालय में जमा कर दी।


दल सीमांकन से भू-स्वामी शिव प्रताप साव संतुष्ट थे, लेकिन जब वे रिपोर्ट लेने तहसील पहुंचे तो उन्हें यह कहते हुए रिपोर्ट नहीं दी गई कि आपत्ति लंबित है और पुनः सीमांकन कराया जाएगा। इसके बाद 11 दिसंबर 2025 को दूसरी बार फिर नई टीम बनाकर सीमांकन कराया गया। इस टीम ने भी सभी बिंदुओं से नाप-जोख कर पुराने सीमांकन को सही ठहराया। यहां तक कि अगले दिन तहसीलदार और एसडीएम ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इसके बावजूद आपत्तिकर्ता संतुष्ट नहीं हुआ और सीमांकन को अधूरा बताता रहा। अब सोमवार, 12 जनवरी को तीसरी बार सीमांकन की तिथि तय की गई है। गौरतलब है कि राजस्व विभाग और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग दोनों के नक्शों में खसरा नंबर 275/2 करबला कोदू चौक के पास और खसरा नंबर 277 गांधी चौक के पास स्पष्ट रूप से दर्शित है। दोनों खसरों के बीच पर्याप्त दूरी होने के बावजूद एक ही भूमि के लिए बार-बार सीमांकन कराना राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब तहसील में सीमांकन के सैकड़ों प्रकरण लंबित पड़े हैं।

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