
डेस्क खबर बिलासपुर ../ जिले के कोटा क्षेत्र में नगर पंचायत अधिनियम के प्रावधानों के तहत रहवासी इलाकों में पोल्ट्री फार्म या चिकन दुकान का संचालन प्रतिबंधित है, इसके बावजूद नगर पंचायत कोटा द्वारा नियमों को दरकिनार करते हुए एक चिकन दुकान को गुमास्ता लाइसेंस जारी कर दिया गया। मामले की शिकायत संबंधित पक्ष ने अनुविभागीय अधिकारी न्यायालय में की, जिसके बाद धारा 133 न्यूसेन्स के तहत विधि अनुसार मामला दर्ज कर सुनवाई की गई।
मामले में गवाहों, पटवारी की रिपोर्ट और फोटोग्राफिक साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने नगर पंचायत को आदेश जारी किया कि दुकान को रहवासी क्षेत्र से दूर उचित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। आदेश के अनुसार नगर पंचायत अध्यक्ष, पार्षद व सीएमओ को मिलकर सोमवारी बाजार के अंतिम रिक्त चबूतरों पर दुकान स्थापित करने का प्रस्ताव पारित करना था, अन्यथा किसी भी दुर्घटना या विवाद की जिम्मेदारी स्वयं नगर पंचायत की होगी।


वर्षों बीत जाने के बाद भी इस आदेश पर अमल नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय तक आवेदन पहुंचाया, जिस पर कलेक्टर बिलासपुर ने थाना प्रभारी, नगर पंचायत सीएमओ और नायब तहसीलदार की संयुक्त टीम गठित कर कार्यवाही कराई। मौके पर पहुंची टीम के दौरान सीएमओ सुखसागर खूंटे ने चिकन दुकान का बचाव करते हुए उसे हटाने से इनकार कर दिया।


पुनः शिकायत पर 19/06/25 को बिलासपुर कलेक्टर द्वारा अनुविभागीय अधिकारी कोटा को निर्देशित किया गया, जिन्होंने नायब तहसीलदार के प्रतिवेदन के आधार पर सीएमओ को ज्ञापन जारी किया। लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सिर्फ एक दुकान पर आदेश होने के बावजूद कोटा में 15-20 दुकानों को हटाने की आवश्यकता है, जिस पर अब तक गंभीरता नहीं दिखाई गई।

अब जब सीएमओ सुखसागर खूंटे का तबादला कर उन्हें मूल पद पर रतनपुर भेज दिया गया है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नए अधिकारी इस लंबित मामले में ठोस कार्रवाई करेंगे। अब देखना होगा कि रहवासियों की गंभीर शिकायतों के बाद नियमों के विरुद्ध चल रहीं इन मुर्गी फार्म और चिकन की दुकान पर कब तक कार्यवाही होती है ।


