बिलासपुर

पत्रकारिता जगत के एक अध्याय का अंत ।
बहुत याद आएंगे शशिकांत कोन्हेर  (भाऊ) ! श्रद्धांजलि

*दबदबा था, दबदबा है, दबदबा रहेगा.* *"विश्व पटल पर फिर लहराया तिरंगा"* *#T20WorldCup2026Final में भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा न्यूजीलैंड के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज कर विश्व विजेता बनने पर भारतीय क्रिकेट टीम के सभी खिलाड़ियों एवं समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।*

बिलासपुर । वो जबभी मिलते थे बड़े ही गर्माहट से मिलते थे । उनसे मिलकर कभी ऐसा अहसास ही नहीं हुआ कि वो हमसे काफी सीनियर हैं । उन्हें मैंने कभी भी सीनियर जूनियर की मानसिकता में उलझते नहीं देखा । भाऊ में एक जादुई छवि थी । वो अपनी बातों से सबको बांधकर रखते थे । पुराने किस्सों की उनकी पोटरी कभी खाली नहीं होती । किसी भी प्रसंग को वो डूबकर सुनाते थे । कहने सुनने के दौरान उनका विनोदी स्वभाव हमें खासा आकर्षित करता था । वो लम्बे समय तक बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष रहे । इस दौरान वो पत्रकारों के हित में सदैव तत्पर दिखे । वो विशुद्ध नेतृत्वकर्ता थे । प्रायः सभी पत्रकार उनकी कही हुई बातों का सम्मान करते थे । हमने कई बार उन्हें पत्रकारहित में सड़क पर आंदोलन करते देखा । शासन-प्रशासन से टकराना और फिर एक सफल कूटनीतिज्ञ की तरह अपने काम को अंजाम देना,ये उनकी ताक़त थी । मुझे भाऊ के चेहरे का भाव सदैव एक जैसा दिखा । भीतर तनाव भी हो लेकिन बाहर सदैव एक मुस्कुराती छवि ही दिखती थी । वो सदा सबको लेकर चलते थे और सबके हितों की रक्षा करते नजर आते थे ।




भाऊ की मेमोरी भी बड़ी तेज थी । उन्हें सबकुछ याद रहता था । उनकी लेखनी तो उम्दा थी ही लेकिन उनका किसी प्रसंग विशेष को सुनाने का ढंग भी जोरदार था । मैंने उन्हें कभी भी किसी ख़ास विचार के अधीन होते नहीं देखा । एक ऊंचा पत्रकार ऐसा ही होता है । वो लम्बे समय से बीमार चल रहे थे । वो कई बार मौत को पटखनी दे चुके थे,लेकिन इस बार शायद ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था । सचमुच आज उनके जाने के बाद ऐसा लगता है कि पत्रकारिता जगत के एक अध्याय का अंत हो गया है । विनम्र श्रद्धांजलि !

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