डेस्क खबरबिलासपुर

बिलासपुर में कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग का आरोप, भूमाफियाओं के हौसले बुलंद!
कोटा के खसरा नंबर 633/1 पर बिना अनुमति कॉलोनी बसाने की शिकायत, एसडीएम से तत्काल रोक लगाने की मांग.



डेस्क खबर बिलासपुर। बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र में कृषि भूमि पर कथित अवैध प्लॉटिंग का मामला सामने आया है। ग्राम कोटा स्थित खसरा नंबर 633/1 की 2.0770 हेक्टेयर जमीन पर बिना सक्षम अनुमति के भूमि का स्वरूप बदलकर अवैध कॉलोनी विकसित किए जाने का आरोप लगाया गया है।
इस संबंध में कोटा प्रेस क्लब के विकास तिवारी ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को लिखित शिकायत सौंपकर तत्काल निर्माण और प्लॉटिंग पर रोक लगाने की मांग की है।
कृषि भूमि पर सड़क और प्लॉटिंग, अनुमति कहां से मिली?
शिकायत के अनुसार, राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि कृषि भूमि के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद कथित तौर पर भू-माफियाओं और अवैध कॉलोनाइजरों द्वारा बिना सक्षम अनुमति के छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 172 के तहत भूमि का व्यपवर्तन कराए बिना तथा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से ले-आउट स्वीकृति लिए बिना जमीन पर मुरुम डालकर सड़क निर्माण और प्लॉटिंग की जा रही है।


यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि जमीन खरीदने वाले आम लोगों के लिए भी भविष्य में गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
शासन को राजस्व का नुकसान, खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की आशंका
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कृषि भूमि पर नियमों को दरकिनार कर कॉलोनी विकसित करने से शासन को राजस्व की हानि हो रही है। वहीं, बिना वैध अनुमति के प्लॉट खरीदने वाले लोगों के साथ धोखाधड़ी की आशंका भी बनी हुई है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कृषि भूमि पर सड़क निर्माण और प्लॉटिंग किसकी अनुमति से की जा रही है? संबंधित विभागों को इसकी जानकारी है या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते अवैध कारोबार फल-फूल रहा है?
एसडीएम से तीन प्रमुख मांगें
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि—
खसरा नंबर 633/1 पर चल रही कथित अवैध प्लॉटिंग पर तत्काल रोक लगाकर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया जाए।
तहसीलदार कोटा एवं नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से भूमि के व्यपवर्तन और ले-आउट अनुमति की जांच कराई जाए।
जांच में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कॉलोनाइजरों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई कर अवैध निर्माण हटाया जाए।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
22 अक्टूबर 2026 को सौंपे गए शिकायत पत्र के साथ खसरा अभिलेख की प्रति भी संलग्न की गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और संबंधित भूमि की जांच कर अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाता है।बड़ा सवाल यही है—क्या कोटा में कृषि भूमि पर कथित अवैध कॉलोनी बसाने वालों पर प्रशासन का शिकंजा कसेगा, या फिर आम लोगों की गाढ़ी कमाई दांव पर लगती रहेगी?

error: Content is protected !!