डेस्क खबरबिलासपुर

कोटा में दिनदहाड़े अवैध शराब की बिक्री !महामाया रेस्टोरेंट में अवैध शराब बिक्री 230 रुपये की बीयर 400 में? थैला लेकर पहुंचे युवकों की संदिग्ध गतिविधियां कैमरे में कैद, पुलिस-आबकारी की कार्रवाई पर सवाल!!



डेस्क खबर बिलासपुर../ बिलासपुर जिले में पुलिस और आबकारी विभाग के कार्यवाही के लाख दावे के बीच ग्रामीण से लेकर शहरी थाना क्षेत्रों में स्थित अधिकांश ढाबा और होटलों में बेखौफ होकर शराबखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है।कोटा थाना क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोटा-लोरमी मुख्य मार्ग स्थित महामाया रेस्टोरेंट/ढाबा में दिनदहाड़े शराब बेचने और परोसने की पुष्टि कैमरे में कैद हुई है। लगातार शिकायत मिलने के बाद ग्राउंड जीरो की तहकीकात में अवैध शराब की बिक्री की पुख्ता पुष्टि भी हुई है। बताया जा रहा कि होटल संचालक का क्षेत्र में इतना रसूख है कि महामाया रेस्टोरेंट में किसी को भी बिना पहचाने के किसी भी समय अवैध शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है। सूत्र दावा करते है कि ढाबा संचालक को पुलिस और आबकारी विभाग का खुला संरक्षण मिला हुआ है और राजनैतिक संरक्षण के चलते खुलेआम शराब की बिक्री बेखौफ हो कर की जा रही है। जिसके चलते जिम्मेदार विभाग भी लंबे समय से चल रहे अवैध शराब के कारोबार में लगाम लगाने में असफल साबित हो रहे है। इतना ही नहीं इस ढाबा में 220 रु कीमत की ठंडी बियर 400 रु में बेच कर ग्राहकों से मनमानी वसूली भी की जा रही है।



पड़ताल के दौरान कैमरे में ढाबा में शराबी बिक्री की पुष्टि के दौरान  दो युवकों की ऐसी गतिविधियां कैमरे में कैद भी हुई है , जिसमें वे एक बड़े थैले के साथ रेस्टोरेंट पहुंचे। बाद में रेस्टोरेंट से बाहर आए एक युवक को थैला सौंपे जाने और उसके बाद दोनों के जंगलनुमा क्षेत्र की ओर जाने का दावा किया गया है। थैले में शराब थी, खाने-पीने का सामान या कुछ और— फिलहाल इसकी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस गतिविधि को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।


पुलिस और आबकारी विभाग से बड़ा सवाल
स्थानीय सूत्रों के हवाले से रेस्टोरेंट में पुलिस और आबकारी विभाग से जुड़े लोगों की आवाजाही के दावे भी किए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने कथित राजनीतिक और विभागीय संरक्षण की बात भी कही है, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में सवाल सीधा है—अगर यहां अवैध शराब बिक रही है तो जिम्मेदार विभागों की नजर क्यों नहीं पड़ी? और अगर आरोप गलत हैं तो विभाग मौके पर जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?
नशामुक्ति अभियान के बीच खुली चुनौती?
जिले में पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ अभियान, चेकिंग और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में मुख्य मार्ग पर स्थित किसी प्रतिष्ठान में यदि अवैध शराब बिक्री की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।
गौरतलब है शराब के नशे में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई ठीक है लेकिन अगर मुख्य मार्ग के किनारे ही अवैध शराब आसानी से उपलब्ध होने के आरोप हैं, तो उस स्रोत तक पुलिस और आबकारी विभाग कब पहुंचेगा? अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग महामाया रेस्टोरेंट के खिलाफ कब कार्यवाही करता है और कब तक पूरी तरह अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगा पाता है।

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