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हिंडालको की बीकेबी टाटीझरिया माइंस में नियमों की अनदेखी, अवकाश के दिन भी कराया जा रहा काम

रविवार को मजदूरों से काम कराने का आरोप, सुरक्षा जूते व अन्य उपकरणों की कमी से श्रमिकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

रिपोर्ट –राहुल गुप्ता

डेस्क खबर सामरी / बलरामपुर। सामरी क्षेत्र से लगे हिंडालको की बीकेबी टाटीझरिया बॉक्साइट माइंस में नियमों की अनदेखी कर रविवार के अवकाश के दिन भी मजदूरों से काम कराए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि रविवार को भी माइंस क्षेत्र में खनन एवं उससे जुड़े कार्यों में श्रमिकों को लगाया जा रहा है। वहीं, मौके पर कुछ मजदूरों के पास आवश्यक सुरक्षा जूते, हेलमेट एवं अन्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई है। इससे माइंस में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


नियमों की अनदेखी कर छुट्टी के दिन भी कराया जा रहा काम

माइंस में श्रमिकों से निर्धारित कार्य दिवस और समय के अलावा काम कराने की स्थिति में श्रम एवं खनन सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है। ऐसे में यदि रविवार को श्रमिकों के निर्धारित साप्ताहिक अवकाश की अनदेखी कर उनसे लगातार काम कराया जा रहा है, तो यह जांच का विषय है।

यह भी जांच की आवश्यकता है कि रविवार को काम पर लगाए गए श्रमिकों को नियमानुसार साप्ताहिक विश्राम दिया गया या नहीं। साथ ही उनकी ड्यूटी, शिफ्ट, कार्य अवधि और उपस्थिति से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि माइंस में श्रमिकों से किस व्यवस्था के तहत काम कराया जा रहा है।

सुरक्षा जूते और उपकरणों की कमी ने बढ़ाई चिंता

खनन क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। हेलमेट, सेफ्टी शूज, दस्ताने और कार्य की प्रकृति के अनुसार अन्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऐसे में यदि श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए बिना माइंस क्षेत्र में काम कराया जा रहा है, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है। सवाल यह भी है कि काम शुरू करने से पहले श्रमिकों के सुरक्षा उपकरणों की जांच कौन करता है और बिना निर्धारित सुरक्षा सामग्री के किसी श्रमिक को कार्यस्थल में प्रवेश की अनुमति कैसे मिलती है?



ठेकेदार और माइंस प्रबंधन की जिम्मेदारी पर सवाल

यदि माइंस में श्रमिक किसी ठेकेदार या एजेंसी के माध्यम से कार्यरत हैं, तो यह भी जांच जरूरी है कि संबंधित ठेकेदार द्वारा श्रमिकों को सभी आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं या नहीं।

इसके साथ ही हिंडालको माइंस प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठता है। यदि कोई श्रमिक बिना आवश्यक सुरक्षा उपकरण के काम कर रहा था, तो मौके पर मौजूद जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक द्वारा उसे काम से क्यों नहीं रोका गया?

रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति

मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभाग द्वारा रविवार की उपस्थिति पंजी, ड्यूटी रोस्टर, शिफ्ट चार्ट, श्रमिकों के साप्ताहिक विश्राम का रिकॉर्ड तथा सुरक्षा उपकरणों के वितरण से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।

साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि रविवार को कितने श्रमिकों से काम कराया गया, उन्हें किस कार्य में लगाया गया था और उस दौरान उनके लिए सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे।

डीजीएमएस के निरीक्षण से स्पष्ट हो सकती है स्थिति

खनन क्षेत्र में सुरक्षा नियमों के पालन की निगरानी में खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि किसी खदान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन की शिकायत सामने आती है, तो सक्षम अधिकारियों द्वारा निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच की जा सकती है।

ऐसे में सवाल यह है कि हिंडालको की बीकेबी टाटीझरिया माइंस में नियमों की अनदेखी कर अवकाश के दिन काम कराने और कथित सुरक्षा खामियों की जांच कब होगी?

फिलहाल रविवार के अवकाश के दिन भी श्रमिकों से काम कराए जाने और कुछ श्रमिकों के पास आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं होने की सामने आई जानकारी ने बीकेबी टाटीझरिया माइंस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें संबंधित विभाग और माइंस प्रबंधन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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