बिलासपुर

आयुष्मान की घोषणा… लेकिन अपोलो में इलाज की तारीख अब भी गायब!
नेता गौरहा का तंज—नेताओं के बयान से मरीजों का इलाज नहीं होता, अस्पताल को भी बताना होगा सच ! बेलतरा विधायक के बाद स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर कांग्रेसी नेता का तीखा प्रहार !!




बिलासपुर। आयुष्मान योजना के जरिए अपोलो अस्पताल में हृदय रोग और डायलिसिस के इलाज को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा के बाद कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने सरकार के साथ-साथ अपोलो अस्पताल की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
गौरहा का कहना है कि सरकार की तरफ से उम्मीद दिखाई जा रही है, लेकिन अपोलो की ओर से तस्वीर अब भी साफ नहीं है। आखिर आयुष्मान कार्ड लेकर पहुंचने वाला मरीज किस तारीख से इलाज करा सकेगा? किन बीमारियों का पैकेज लागू होगा? कौन-सी सुविधाएं मिलेंगी? और सबसे अहम—क्या मरीज को इलाज के लिए अपनी जेब से कोई अतिरिक्त रकम देनी पड़ेगी?
राजनीतिक कटाक्ष करते हुए गौरहा ने कहा कि सरकार बयान दे रही है, नेता उम्मीद दिखा रहे हैं और मरीज तारीख पूछ रहा है। अब अपोलो को भी सामने आकर बताना चाहिए कि आयुष्मान के नाम पर मरीजों को वास्तव में क्या सुविधा मिलने जा रही है।सवाल यह भी है कि अगर व्यवस्था तैयार है तो सरकारी आदेश, लागू होने की तारीख और उपचार की पूरी सूची सार्वजनिक करने में हिचक क्यों? और अगर व्यवस्था अभी तैयार नहीं है तो मरीजों के बीच उम्मीद किस आधार पर बनाई जा रही है?
डंकाराम का सीधा सवाल—
क्या आयुष्मान की घोषणा सिर्फ मंच और बयान तक रहेगी, या अपोलो के काउंटर तक भी पहुंचेगी? क्योंकि गरीब मरीज को भाषण नहीं, कार्ड दिखाने पर इलाज चाहिए।अब निगाह सरकार और अपोलो प्रबंधन दोनों पर है कि इस पूरे मामले में स्पष्ट आदेश और आधिकारिक स्थिति कब सामने आती है।राजनीतिक बयानबाजी के बीच अपोलो प्रबंधन की ओर से स्थिति पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आयुष्मान से इलाज को लेकर किए जा रहे आश्वासन जमीन पर कब उतरेंगे और इसका सीधा लाभ गरीब मरीजों को कब मिलेगा ।

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