
डेस्क खबर बिलासपुर../ जिले के सीपत क्षेत्र में उद्योगों से जुड़े भारी वाहनों की कथित मनमानी अब ग्रामीणों की जान पर भारी पड़ती नजर आ रही है। गतौरा से कंकालीन पुल होते हुए मोपका, बिलासपुर और NTPC सीपत को जोड़ने वाला नहर मार्ग भारी वाहनों के दबाव में बुरी तरह जर्जर हो चुका है। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और बारिश का पानी राहगीरों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित है, वहां ये वाहन पहुंच कैसे रहे हैं? जल संसाधन विभाग ने रास्ते में बैरिकेड और अवरोध लगाए हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कुछ भारी वाहन बैरिकेड तोड़कर या उसके बगल से रास्ता बनाकर लगातार गुजर रहे हैं।
बोर्ड लगा, बैरिकेड लगा… फिर भी वाहन बेखौफ!
नियमों की रोक के बावजूद यदि भारी वाहन दिन-रात इस रास्ते से गुजर रहे हैं तो सवाल सिर्फ वाहन चालकों पर नहीं, निगरानी और कार्रवाई करने वाली पूरी व्यवस्था पर है।ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े भारी वाहनों के दबाव ने सड़क और पुल की हालत बिगाड़ दी है। विशेष रूप से राशि स्टील से जुड़े वाहनों की आवाजाही को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है। ओवरलोडिंग के आरोपों की भी जांच की मांग उठ रही है।
चार-पांच फीट के गड्ढे, बारिश में सड़क या मौत का जाल?
सड़क की हालत इतनी खराब बताई जा रही है कि कई स्थानों पर गड्ढे चार से पांच फीट तक गहरे हो चुके हैं। बारिश में पानी भर जाने के बाद वाहन चालकों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा तक नहीं लग पाता। ऐसे में दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
खारंग जलाशय से जुड़े अधिकारियों द्वारा भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर मस्तूरी थाने में शिकायत और पुलिस से सहयोग मांगने की बात की जानकारी भी अधिकारियों ने दी है लेकिन उसके बाद भी मस्तूरी पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर रही है जिसके कारण विभाग को नुकसान हो रहा जबकि इस सड़क पर गुजरने वाले ग्रामीणों की जान दांव में लगी रहती है ।

हालांकि मस्तूरी पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप की पुष्टि और मामले में उद्योगपतियों के इन भारी भरकम वाहनों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करने की मजबूरी के पीछे की वजह जानने के लिए जब मस्तूरी थाना प्रभारी के मोबाइल में कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा ।
अब सवाल सीधा है—जब विभाग शिकायत कर चुका है तो पुलिस कार्रवाई कब करेगी?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहन किसके इशारे पर चल रहे हैं? सरकारी बैरिकेड टूट रहे हैं तो इसके नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है?
और अगर ओवरलोड वाहन सड़क-पुल को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो इनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं? क्या मस्तूरी पुलिस किसी हादसे के इंतजार में है या उद्योगपतियों के आगे नतमस्तक .??
सीपत क्षेत्र में जल संसाधन विभाग में करोड़ो का भ्रष्टाचार ,ठेकेदार और अधिकारियों की साठगांठ ? खुलासा आगामी अंकों में
