डेस्क खबर

करोड़ों की अनियमितता के आरोपों में घिरे डीईओ, जांच रिपोर्ट शासन पहुंची फिर भी कार्रवाई का इंतजार
पुराने मामलों में निलंबन से लेकर विभागीय जांच तक का रिकॉर्ड, बलरामपुर में पदस्थापना के बाद करीब 4.5 करोड़ की अनियमितता के आरोपों की भी हुई जांच..



डेस्क खबर बलरामपुर../ शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव एक बार फिर गंभीर आरोपों और विभागीय जांच को लेकर सुर्खियों में हैं। बलरामपुर में पदस्थापना के बाद करीब 4.5 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच पूरी होने के बाद कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने जांच रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेज दी है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट करीब एक सप्ताह पहले शासन स्तर तक पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक कार्रवाई सामने नहीं आई है।


मनीराम यादव का पूर्व पदस्थापना कार्यकाल भी विवादों से जुड़ा रहा है। वर्ष 2012 से 2014 के बीच मध्यान्ह भोजन योजना की राशि में करीब 1.67 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का आरोप लगा था। आरोपों के मुताबिक शासन की अनुमति के बिना अलग बैंक खाता खोलकर राशि के उपयोग में गड़बड़ी की गई। इसी दौरान रसोइया मानदेय के नाम पर करीब 55 लाख रुपये की कथित अनियमितता का आरोप भी सामने आया।


मध्यान्ह भोजन योजना में ग्राम पंचायत रघुनाथपुर के सरपंच द्वारा वापस किए गए 70 क्विंटल चावल की स्टॉक पंजी में आमद दर्ज नहीं किए जाने को लेकर भी करीब 45 हजार रुपये के खाद्यान्न की कथित हेराफेरी का आरोप लगा।
वर्ष 2016 में सरगुजा संभाग आयुक्त ने 2.42 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले में यादव को निलंबित किया था। इसके बाद विभागीय जांच का सामना करना पड़ा। 17 जून 2020 को तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर ने शासकीय राशि हड़पने के प्रयास के मामले में एफआईआर के निर्देश भी दिए थे।
पेंशन प्रकरणों के निराकरण में लापरवाही पाए जाने के बाद 15 मई 2025 को सरगुजा संभाग आयुक्त ने उन्हें निलंबित किया। निलंबन के बाद विभागीय जांच के आदेश हुए, जो सूत्रों के अनुसार अगस्त 2026 तक चली।


अब बलरामपुर में हुई नई जांच की रिपोर्ट शासन तक पहुंचने के बाद निगाहें कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि करोड़ों की कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच रिपोर्ट शासन तक पहुंचने के बाद भी कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?सूत्रों द्वारा लगाए जा रहे राजनीतिक और विभागीय संरक्षण के दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। ऐसे में शासन की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि जांच में सामने आए तथ्यों पर क्या कदम उठाया जाता है।

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