
डेस्क खबर बिलासपुर ../ गरीब के हिस्से का सरकारी चावल… और बदले में हाथ में नगद रकम! बिलासपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लेकर सामने आए एक और कथित वीडियो ने मामले ने खाद्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला वार्ड क्रमांक 62 शास्त्री नगर सरकंडा का बताया जा रहा है ,आरोप है कि राशन दुकान में हितग्राही का फिंगरप्रिंट लेने के बाद उसे निर्धारित चावल देने के बजाय कथित तौर पर नगद राशि दी जा रही है। मामले से जुड़ा वीडियो सामने आने का दावा किया गया है, हालांकि वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राशन दुकान से लेकर बाजार तक कौन चला रहा कथित खेल?
सवाल सिर्फ एक दुकान का नहीं है। आरोप है कि कुछ जगहों पर हितग्राहियों से सरकारी चावल लेकर उसे आगे कारोबारियों और राइस मिलों तक पहुंचाने का कथित नेटवर्क सक्रिय है। यदि ऐसा है तो यह केवल राशन दुकान की अनियमितता नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन की जांच का मामला है।
विभाग को ई-पॉस मशीन का रिकॉर्ड, वास्तविक स्टॉक, वितरण रजिस्टर, परिवहन वाहनों का GPS रिकॉर्ड और संबंधित गोदाम व राइस मिलों के स्टॉक का मिलान कराना चाहिए।
नोटिस नहीं, अब चाहिए जवाब
शिकायतों और कथित वीडियो के बाद यदि कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित रहती है तो विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

गरीब के नाम पर आया चावल आखिर जा कहां रहा है?
हितग्राही को चावल की जगह पैसा क्यों दिया जा रहा है?
अगर आरोप सही हैं तो पीछे कौन है?
और खाद्य विभाग कब करेगा पूरी सप्लाई चेन की जांच?
गरीब के हक के अनाज पर कथित खेल की निष्पक्ष जांच अब जरूरी है ताकि गरीबों को पेट भरने के लिए दिए जाने वाले सरकारी चावल असली जरूरतमंदों तक पहुंच पाए और सरकारी राशन के नाम पर चल रही कालाबाजारी और मुनाफाखोरी पर लगाम लगाई जा सके ।
