डेस्क खबरबिलासपुर

हाईवे पर मौत का सफर! ऑटो में क्षमता से ज्यादा बच्चे, ट्रैफिक अमला बेखबर ! नियमों की धज्जियां उड़ाकर बच्चों की जिंदगी दांव पर! गनियारी-कोटा हाईवे का खतरनाक VIDEO




डेस्क खबर बिलासपुर./ एक तरफ जहां प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर जिले में  सड़क हादसों को रोकने के लिए पुलिस और ट्रैफिक विभाग लगातार जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं और चेकिंग का दावा कर रहे हैं, लेकिन गनियारी से कोटा जाने वाले नेशनल हाईवे पर सामने आया एक वीडियो इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। वीडियो में एक ऑटो में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे सवार दिखाई दे रहे हैं। बच्चे गनियारी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के बताए जा रहे हैं जिसकी पुष्टि खुद सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों और ऑटो चालक ने की है। इस वीडियो में देखा जा सकता कि क्षमता से ज्यादा बच्चों को ठूंस ठूंस कर भरा गया है इतना ही नहीं स्कूली बच्चे नेशनल हाईवे में भारी वाहनों की आवाजाही के बीच पीछे स्पीड से दौड़ती ऑटो पर लटकते नजर आ रहे है मानो जैसे कोई स्टंट कर रहे है।



सबसे गंभीर बात यह है कि जिस सड़क पर यह ऑटो दौड़ता नजर आया, वहां दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर वाहन चलाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने से कम नहीं है।


सवाल सिर्फ ऑटो चालक की कथित लापरवाही का नहीं, बल्कि हाईवे पर निगरानी और नियमित पेट्रोलिंग व्यवस्था का भी है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि इस तरह के नजारे लंबे समय से सामने आते रहे हैं। यदि यह सच है तो जिम्मेदार विभाग की नजर अब तक क्यों नहीं पड़ी?


एक ओर ट्रैफिक पुलिस हेलमेट और वाहन जांच के नाम पर लगातार कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी ऐसी तस्वीरें व्यवस्था की प्राथमिकताओं और जिले भर में चल रहे जागरूकता अभियान के दावों पर पर सवाल खड़े कर रही हैं।
यह सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी है। जरूरत है कि संबंधित विभाग वीडियो की जांच कर ऑटो चालक और वाहन की क्षमता की पड़ताल करे तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई सुनिश्चित करे।


अब देखना होगा कि स्कूली बच्चों को लेकर हाईवे पर मौत की सवारी बन कर चल रहे इस कड़वे सच की तस्वीरों को उच्च अधिकारी कितने गंभीरता से लेते है और महीनों से चल रहा इस मौत के खेल से बेखफ़र जिम्मेदार पर क्या एक्शन लेते है? वही शिक्षा का पाठ पढ़ाने वाली सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन के ऊपर भी सवाल खड़े हो रहे है कि बच्चों को शिक्षा देने के इस मंदिर से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई और उन्होंने इस तरह बच्चों को ऑटो में जाने की परमिशन कैसे दे दी । या फिर स्कूल प्रबंधन और जिम्मेदार विभागों की नजर में बच्चों की सुरक्षा के दावे सिर्फ कागजों पर ही है ??

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