डेस्क खबरबिलासपुर

खारंग जलाशय विभाग व NTPC की की लापरवाही से जनता कर मौत का सफर ! कंकालीन पुल से गतौरा, मोपका, बिलासपुर,सीपत मार्ग में जानलेवा गड्ढों का अंबार ! भारी वाहन की बेखौफ आवाजाही , गुणवत्ता पर भ्रष्टाचार भारी !!




डेस्क खबर बिलासपुर./ बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र के  ग्राम गतौरा से कंकालीन पुल होते हुए मोपका, बिलासपुर और NTPC सीपत को जोड़ने वाला नहर मार्ग बदहाली की तस्वीर बन गया है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कई गड्ढे चार से पांच फीट तक गहरे हैं, जिनमें भारी वाहन तक फंस रहे हैं। बरसात में गड्ढों में पानी भरने के बाद सड़क की वास्तविक स्थिति और अधिक खतरनाक और जानलेवा साबित हो जाती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क पर बने कई गड्ढे चार से पांच फीट तक गहरे हो गए हैं। इनमें भारी वाहन फंसने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। सड़क की खराब स्थिति और लगातार भारी वाहनों की आवाजाही ने ग्रामीणों, किसानों और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।



*भारी वाहनों की रोक के बोर्ड, फिर भी आवाजाही जारी*
इस मार्ग पर जगह-जगह भारी वाहनों का प्रवेश निषेध संबंधी बोर्ड और होर्डिंग लगाए गए हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी करते हुए भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार आसपास संचालित औद्योगिक गतिविधियों के कारण भारी वाहनों का दबाव इस मार्ग पर बढ़ा है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ वाहनों का वजन अत्यधिक अधिक होता है, जिससे सड़क और पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।


*हर पांच मिनट में भारी वाहन? पुल पर बढ़ता दबाव*

ग्रामीणों का कहना है कि कंकालीन पुल के निर्माण और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के बाद यहां भारी वाहनों का आवागमन काफी बढ़ा है। आसपास की कंपनियों से जुड़े भारी वाहनों के लगातार गुजरने की शिकायत है।
विशेष रूप से राशि स्टील से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर ग्रामीणों ने सबसे ज्यादा आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि भारी लोड वाले वाहनों के लगातार गुजरने से सड़क और पुल की स्थिति प्रभावित हो रही है। हालांकि, वाहनों की वास्तविक संख्या, वजन और नियमों के उल्लंघन की स्थिति संबंधित विभाग की जांच से ही स्पष्ट होगी।


*कंकालीन पुल भी क्षतिग्रस्त, एक साल से निर्माण की रफ्तार पर सवाल*

ग्रामीणों के अनुसार भारी वाहनों की आवाजाही से कंकालीन पुल को भी नुकसान पहुंचा, जिसके बाद क्षेत्रवासियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार आवाज उठाई गई। इसके बाद NTPC सीपत की ओर से पुल निर्माण के लिए 42 लाख रुपये की राशि दिए जाने की बात सामने आई है।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि राशि स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य इसी गति और गुणवत्ता से चलता रहा तो पुल की मजबूती को लेकर भविष्य में फिर सवाल खड़े हो सकते हैं।

इन आरोपों की तकनीकी जांच आवश्यक है। निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री, डिजाइन, गुणवत्ता और कार्य की प्रगति की सक्षम एजेंसी से जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

*खारंग जलाशय विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल*

यह मार्ग और पुल खारंग जलाशय से संबंधित व्यवस्था से जुड़े होने के कारण स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क की लगातार खराब होती स्थिति के बावजूद विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है।

ग्रामीणों की मांग है कि विभाग यह स्पष्ट करे कि भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक के बावजूद किन परिस्थितियों में वाहनों की आवाजाही जारी है और सड़क व पुल की सुरक्षा के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

*NTPC से भी जवाब की अपेक्षा*

पुल निर्माण के लिए राशि दिए जाने की बात सामने आने के बाद अब ग्रामीण NTPC प्रबंधन से भी निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर सवाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी विकास कार्य के लिए बड़ी राशि उपलब्ध कराई गई है तो उसकी गुणवत्ता और समयबद्धता की निगरानी भी जरूरी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के विकास के नाम पर मिलने वाली राशि का अपेक्षित लाभ जमीन पर दिखाई नहीं देता। उन्होंने पूर्व के कुछ निर्माण कार्यों—जैसे ग्राम रलिया में श्मशान घाट की बाउंड्रीवाल तथा भिलाई से रलिया सड़क निर्माण—की गुणवत्ता और उपयोगिता की भी जांच की मांग की है। इन मामलों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।हादसे का इंतजार या समय रहते कार्रवाई?
सड़क की बदहाली का असर किसानों, ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए गहरे गड्ढे और भारी वाहनों की आवाजाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल मार्ग का तकनीकी निरीक्षण, पुल निर्माण की गुणवत्ता की जांच और प्रतिबंधित भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब रोक के बोर्ड मौजूद हैं, तो भारी वाहन किसकी अनुमति या किसकी अनदेखी के सहारे दौड़ रहे हैं?
42 लाख के पुल निर्माण की निगरानी कौन कर रहा है और प्रशासन किसी हादसे का इंतजार क्यों करे?

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