डेस्क खबरबिलासपुर

रास्ते में बढ़ी प्रसव पीड़ा तो एंबुलेंस में ही गूंजी बच्चे की किलकारी, EMT की सूझबूझ से मां और नवजात दोनों सुरक्षित


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डेस्क खबर बिलासपुर। रायगढ़ से बिलासपुर पहुंचे एक दंपती के लिए 21 अगस्त की सुबह उस वक्त बेहद खास बन गई, जब अस्पताल पहुंचने से पहले ही 108 एंबुलेंस के भीतर बच्चे की किलकारी गूंज उठी। महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद एंबुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराना पड़ा। इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में EMT उमा साहू ने धैर्य और समझदारी से स्थिति संभाली। बाद में मां और नवजात को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां दोनों की हालत सुरक्षित बताई गई है।

अचानक शुरू हुई प्रसव पीड़ा, तुरंत बुलाई गई एंबुलेंस

जानकारी के अनुसार रायगढ़ निवासी मनोज मानिकपुरी अपनी पत्नी कविता मानिकपुरी के साथ 21 अगस्त की सुबह करीब 7:10 बजे किसी काम से बिलासपुर आए थे। इसी दौरान कविता को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।परिजनों ने बिना देरी किए 108 एंबुलेंस को सूचना दी। कॉल मिलते ही ऑन ड्यूटी EMT उमा साहू और पायलट कुंदन यादव तत्काल एंबुलेंस लेकर मौके पर पहुंचे। इसके बाद कविता को अस्पताल ले जाने के लिए रवाना किया गया।

रास्ते में बिगड़ी स्थिति, एंबुलेंस रोककर कराया प्रसव

अस्पताल की ओर जाते समय कविता की प्रसव पीड़ा अचानक काफी बढ़ गई। स्थिति को देखते हुए EMT उमा साहू ने पायलट कुंदन यादव को सुरक्षित स्थान पर एंबुलेंस रोकने के लिए कहा।इसके बाद उमा साहू ने मनोज मानिकपुरी की मदद से एंबुलेंस के भीतर ही प्रसव की प्रक्रिया शुरू कराई। हालात उस समय और चुनौतीपूर्ण हो गए, जब प्रसव के दौरान बच्चे की नाल फंस गई।

मुश्किल समय में EMT ने दिखाई सूझबूझ

स्थिति गंभीर होने के बावजूद उमा साहू ने घबराए बिना आवश्यक सावधानियां बरतीं और अपनी सूझबूझ से सुरक्षित प्रसव कराया। कुछ ही देर में एंबुलेंस के भीतर नवजात का जन्म हुआ।प्रसव के बाद मां और बच्चे को बिना समय गंवाए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों की निगरानी में दोनों को भर्ती किया गया। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।

एंबुलेंस टीम की तत्परता की हो रही सराहना

इस पूरे घटनाक्रम में 108 एंबुलेंस टीम की समय पर पहुंच और EMT उमा साहू की सूझबूझ महत्वपूर्ण साबित हुई। पायलट कुंदन यादव ने भी परिस्थितियों के अनुरूप एंबुलेंस को सुरक्षित स्थान पर रोककर मेडिकल प्रक्रिया में सहयोग किया।मुश्किल परिस्थिति में समय पर निर्णय लेकर मां और नवजात को सुरक्षित रखना एंबुलेंस टीम की तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण माना जा रहा है।

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