
डेस्क खबर बिलासपुर../ बिलासपुर जिले का तखतपुर थाना क्षेत्र में अवैध शराब और जुए को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि पुलिसिया संरक्षण में थाना क्षेत्र में गैरकानूनी गतिविधियों को संचालित करने के लिए एक निश्चित राशि थाने में हर महीने हफ्ते नजराने के रूप में भेट की जाती है, जिसके बाद क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार खूब फल फूल रहा है। सूत्रों का दावा है कि बेलपान रोड में स्थित बाराही ग्राम में किसी कश्यप नामक युवक द्वारा बड़े स्तर में जुए की महफिल सजा कर रोज लाखों रु की हारजीत का खेल खेला जा रहा है नाम न छापने की शर्त में एक सूत्र ने दावा किया है कि जुए की महफिल के लिए थाने में बकायदा हफ्ता भी बंधा हुआ है। यहा तक की क्षेत्र में मोबाइल के जरिए अंग्रेजी शराब ज्यादा कीमत पर आपके ठिकाने तक पहुंचाने के लिए भी थाना क्षेत्र में व्यवस्था बनी हुई हैं।। थाना क्षेत्र में स्थित कई ढाबा और होटलों के अवैध रूप से शराब पिलाने की व्यवस्था भी बड़े आराम से मुहैया हो जाता है।इसी से जुड़ा हुआ एक स्टिंग का वीडियो सामने आया है मीडिया को वीडियो उपलब्ध करवाने वाले सूत्र के दावे के अनुसार यह वीडियो बिलासपुर तखतपुर मुख्य मार्ग में स्थित रंजित द ढाबा का बताया जा रहा है वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह ढाबे के अंदर कुछ लोग बैठकर शराब सेवन करते नजर आ रहे है और टेबल भी चखना के साथ शराब की बोतल नजर आ रही है।
एक तरह जहां कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जिले के एसएसपी रजनेश सिंह अवैध शराब, जुआ और असामाजिक गतिविधियों पर लगातार सख्ती से कार्यवाही करने के निर्देश दे रहे हैं। ऐसे में तखतपुर से इस तरह की शिकायतें सामने और लग रहे गंभीर आरोप वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश और स्थानीय थाना स्तर पर उनके पालन के बीच अंतर की ओर इशारा करता है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में चल रहे अवैध हुए और शराब की भनक लगने के बाद कप्तान साहब के फरमान के बाद स्पेशल टीम ने क्षेत्र में गुपचुप तरीके से रेड मारी तो एक महिला को भारी मात्रा में कच्ची शराब के साथ गिरफ्तार भी किया। 21 अगस्त को एसडीओपी नूपुर उपाध्याय की कार्रवाई में कच्ची शराब पकड़ी गई। कार्रवाई के दौरान महिला आरोपी द्वारा पुलिसकर्मियों के सामने थाने में ही बकायदा कच्ची शराब बेचने के एवज में तखतपुर थाना में तैनात पुलिसकर्मियों के नाम सहित हर ‘महीने का पैसा’ दिए जाने का दावा किया गया है। जिसकी पुष्टि महिला अफसर ने फोन में हुई बातचीत में स्वयं की पूरे आरोपों पर महिला अफसर का कहना है कि आरोपी महिला द्वारा लगाया गया आरोप गंभीर है और पूरा मामला एसएसपी साहब के संज्ञान में है और आरोपों की जांच की जा रही है।

आरोप बेहद गंभीर है। इसलिए जरूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो। आरोप सही हैं या गलत, जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन सवाल जरूर खड़ा होता है—जिस अवैध शराब कारोबार और जुए की महफिल की कथित चर्चा क्षेत्र में थी, उस पर स्थानीय थाना पुलिस की नजर क्यों नहीं पड़ी? ऐसे में सवाल सीधा है—अगर त्योहार के समय ढाबों में खुलेआम शराब परोसी जा रही थी, तो थाना पुलिस की निगरानी टीम कहां थी?
एसएसपी रजनेश सिंह की सख्ती के बाद भी तखतपुर में कानून व्यवस्था पर सवाल क्यों खड़े हो रहे है ?
क्या तखतपुर में शराब की कथित होम डिलीवरी का नेटवर्क चल रहा है?


क्या जुए की महफिलों पर स्थानीय पुलिस की नजर है?
‘महीने के पैसे’ वाले गंभीर आरोप की जांच कब होगी?
ढाबे में शराब परोसने के वीडियो पर क्या कार्रवाई होगी?
और सबसे बड़ा सवाल—जब एसडीओपी को खुद मैदान में उतरकर कार्रवाई करनी पड़े, तो थाना प्रभारी की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है? तखतपुर में अब जरूरत सिर्फ एक-दो छापों की नहीं, बल्कि अवैध शराब, जुए और कथित संरक्षण के पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की है। वैसे भी पूरे मामले में तखतपुर थाना प्रभारी ने भी एक मीडिया कर्मी से बातचीत में कहा है कि इलाके में जुए की भनक उनको भी लगी है लेकिन अभी तक उन्हें पुलिस पकड़ नहीं पाई है। मतलब साफ है कि तखतपुर पुलिस का खुफिया सूचना तंत्र या तो कमजोर है या थाना प्रभारी का अपने स्टाफ में नियंत्रण नहीं है। वही सूत्रों का दावा है कि जिन पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए है यदि उनसे जिले के उच्च अधिकारी अपने हिसाब से पूछताछ करे तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और आरोपों का सच सामने आ जाएगा। कहा जाता है कानून बिना सबूतों के नहीं चलता है और सबूत ढूंढने का काम वर्दी का है!

