


डेस्क खबर बिलासपुर/सिरगिट्टी../ करोड़ों रुपये की लागत से बन रही नाली अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि निर्माण एजेंसी भगवती कंस्ट्रक्शन ने सीधे ट्रांसफॉर्मर से बिजली चोरी कर निर्माण कार्य कराया। वीडियो वायरल होने के बाद बिजली विभाग हरकत में आया और करीब 77 हजार रुपये की पेनाल्टी लगा दी। साथ ही ठेकेदार प्रशांत मिश्रा के खिलाफ सिरगिट्टी थाने में एफआईआर दर्ज कराने की बात कही गई। लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या रसूखदार ठेकेदार के सामने बिजली विभाग और नगर निगम दोनों बेबस हैं?
इस नाली निर्माण को लेकर पहले भी कई गंभीर आपत्तियां उठ चुकी हैं। स्थानीय लोगों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। इसके बाद निगम ने ड्राइंग और स्वीकृत डिजाइन के विपरीत निर्माण होने पर नोटिस जारी कर नियमों के अनुसार दोबारा निर्माण करने के निर्देश दिए थे। लेकिन नोटिस के बाद भी न तो नाली टूटी और न ही निर्माण में कोई बड़ा सुधार दिखाई दिया।

मामला सिर्फ गुणवत्ताहीन निर्माण तक सीमित नहीं है। निर्माण के दौरान नाली के बीचों-बीच चालू बिजली का खंभा छोड़ दिया गया। बिजली विभाग ने इसे गंभीर खतरा बताते हुए निगम को पत्र लिखकर खंभा हटाने को कहा था। बावजूद इसके आज तक खंभा वहीं खड़ा है। जबकि विभागीय प्रक्रिया पूरी होने का दावा किया जा चुका है।
इस बीच बिजली चोरी का वीडियो सामने आया, जिसमें निर्माण कार्य के लिए सीधे ट्रांसफॉर्मर से बिजली लेने का आरोप है। विभाग ने जुर्माना तो लगा दिया, लेकिन एफआईआर अब तक नहीं कराई। सवाल यह भी है कि यदि कोई आम व्यक्ति बिजली चोरी करता तो क्या उसके मामले में भी इतनी ही नरमी बरती जाती? सूत्र तो यह दावा करते है कि नियमों को आड़ बनाकर सिर्फ जुर्माना वसूल कर ठेकेदार को पुलिसिया कार्यवाही से बचाने की जुगत में सिस्टम लगा हुआ है।


अब यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
क्या 77 हजार रुपये की पेनाल्टी लगाकर करोड़ों के काम में हुई गंभीर लापरवाही पर पर्दा डाला जा रहा है?
आखिर एफआईआर दर्ज कराने में देरी क्यों हो रही है?
निगम के नोटिस के बावजूद नियमों के विपरीत बना निर्माण अब तक क्यों नहीं तोड़ा गया?
बिजली विभाग की चेतावनी के बाद भी खतरनाक स्थिति को क्यों नहीं सुधारा गया?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
फिलहाल तस्वीर यही बताती है कि करोड़ों रुपये के इस निर्माण में नियम-कायदों से ज्यादा असर रसूख का दिखाई दे रहा है। विभाग नोटिस जारी कर रहे हैं, जुर्माना लगा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई जमीन पर नजर नहीं आ रही। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कौन करेगा, और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदार पर कब होगी ठोस कार्रवाई? और कब जनता की सुरक्षा के मद्देनजर नाली निर्माण होगा ??
अगले अंक में नोटिस पर क्यों नहीं हुई कार्यवाही निगम से दस्तावेजों मिलने के बाद ..

