


डेस्क खबर बिलासपुर../ प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में शुक्रवार को जो हुआ, वह हादसा कम और लापरवाही का नतीजा ज्यादा नजर आता है। नगर निगम के काम में लगे ठेकेदार ने पांच गरीब मजदूरों की जान दांव पर लगा दी। हाईटेंशन बिजली लाइन के ठीक नीचे इलेक्ट्रिक पोल खड़ा कराया गया, लेकिन सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं किए गए। न बिजली लाइन बंद कराई गई, न पर्याप्त सुरक्षा उपकरण दिए गए और न ही मजदूरों की जान की परवाह की गई।
जैसे ही पोल हाईटेंशन लाइन से टकराया, तेज करंट फैल गया। चार पुरुष और एक महिला मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। ये वे लोग हैं जो रोज की मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते हैं, लेकिन ठेकेदार की कथित लापरवाही ने उन्हें अस्पताल के बिस्तर पर पहुंचा दिया। इस मामले का सबसे बाद दिलचस्प पहलू यह है कि सिरगिट्टी के आदर्श नगर पानी टंकी के पास दोपहर में हुई इस गंभीर हादसे की सूचना सिरगिट्टी पुलिस को रात तक तक नहीं लग पाई थी। जबकि स्थानीय लोगों और डायल 112 की मदद से सभी घायल मजदूरों को इलाज के तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती करवाया है हालांकि सिरगिट्टी थाना प्रभारी ने कहा है कि इस मामले को संज्ञान में लेकर इसकी जांच की जाएगी और मामले में दोषी पाए जाने वाले के खिलाफ कानून के हिसाब से कार्यवाही की जाएगी ।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसकी अनुमति से हाईटेंशन लाइन के नीचे काम शुरू कराया गया? क्या सुरक्षा ऑडिट हुआ था? क्या बिजली विभाग से लाइन बंद कराने की प्रक्रिया पूरी की गई थी? या फिर काम जल्दी खत्म करने की जल्दबाजी में मजदूरों की जिंदगी को सस्ता समझ लिया गया?

हर बड़े हादसे के बाद जांच के आदेश दे दिए जाते हैं, लेकिन गरीब मजदूरों के परिवारों को न्याय कब मिलता है? अगर जांच में ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो सिर्फ नोटिस नहीं, बल्कि आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी का गंभीर मामला प्रतीत होता है। गरीब मजदूरों की जान की कीमत सिर्फ मुआवजा नहीं हो सकती। दोषियों की जवाबदेही तय होना ही इस हादसे का सबसे बड़ा न्याय होगा।