


डेस्क खबर बिलासपुर ./ जिले की धार्मिक नगरी रतनपुर में बिलासपुर कलेक्टर के आदेश को खुला ठेंगा दिखाया जा रहा है एक तरफ जिला प्रशासन पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए आदेश जारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ रतनपुर के महामाया बाईपास गांधीनगर स्थित भारत पेट्रोल पंप पर उन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आरोप है कि पेट्रोल संकट के बीच यहां बेखौफ तरीके से डिब्बों में पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा है। जबकि कलेक्टर साहब ने अपने आदेश में डब्बों , जर्किन बोतलों पर ईंधन देने पर बैन लगाया हुआ है और आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त कार्यवाही करने की बात कही हुई है ।
हैरानी की बात यह है कि पेट्रोल जैसे अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ को खुले डिब्बों में देना न केवल सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि किसी बड़े हादसे को भी न्योता दे सकता है। इसके बावजूद यदि यह सब खुलेआम हो रहा है, तो सवाल सिर्फ पेट्रोल पंप संचालक पर नहीं बल्कि निगरानी करने वाले अधिकारियों पर भी खड़ा होता है।

जब आम लोग पेट्रोल के लिए भटक रहे हैं, कई पंपों पर “स्टॉक नहीं है” का बोर्ड लगा है, तब आखिर कुछ लोगों को डिब्बों में ईंधन कैसे उपलब्ध कराया जा रहा है? क्या नियम-कानून सिर्फ दिखावे के लिए हैं? या फिर जिम्मेदार विभाग ने आंखें मूंद रखी हैं?
यदि शिकायतें सही हैं तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि प्रशासनिक आदेशों की सीधी अवहेलना है। ऐसे मामलों में खानापूर्ति नहीं, बल्कि जांच कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होना जरूरी है, ताकि यह संदेश जाए कि कानून सबके लिए बराबर है। अब सबसे बड़ा सवाल है कलेक्टर के आदेशों से बड़ा आखिर कौन है, जो पेट्रोल संकट के बीच भी नियमों को खुलेआम चुनौती दे रहा है?