डेस्क खबरबिलासपुर

अटल आवास योजना में करोड़ों का खेल ,पुख्ता शिकायत के बाद भी दोषियों पर मेहरबानी ? नगर पंचायत कोटा पर उठे संरक्षण के सवाल ? सूचना का अधिकार बना मजाक .!!



डेस्क खबर बिलासपुर./ जिले के कोटा विधानसभा क्षेत्र के करगी रोड कोटा में संचालित प्रधानमंत्री अटल आवास योजना कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े को लेकर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि फर्जी दस्तावेज, अपात्र हितग्राहियों को लाभ और नियमों की अनदेखी के संबंध में कई विभागों में शिकायतें, दस्तावेजी साक्ष्य और संबंधित लोगों के नाम सौंपे जाने के बावजूद आज तक किसी अधिकारी या कर्मचारी पर निलंबन, विभागीय जांच या कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।


सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कार्रवाई रुक क्यों गई? क्या जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, या फिर किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है? शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि सबूत उपलब्ध हैं, तो दोषियों पर कार्रवाई करने में देरी किस बात की है?
CMO की भूमिका भी सवालों के घेरे में
शिकायतकर्ताओं ने नगर पंचायत कोटा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी  कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या CMO अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर रहे हैं या फिर पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं?
RTI कानून भी बेअसर?


आरोप है कि नगर पंचायत के जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी सूचना का अधिकार कानून की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सूचना देने के बजाय आवेदकों को नोटिस भेजकर दबाव बनाया जाता है। सवाल यह भी है कि जब अन्य विभागों में सूचना नहीं देने पर 25 हजार रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जाता है, तो यहां जवाबदेही तय क्यों नहीं हो रही?
जेडी कार्यालय पर भी सवाल


शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले की जानकारी संयुक्त संचालक (JD) स्तर तक पहुंचने के बाद भी कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इससे पूरे प्रकरण की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनता का पैसा, जवाबदेही किसकी?.


शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर योजना का लाभ लेने वालों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और शासन के धन तथा जनता के टैक्स के कथित दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि प्रधामनंत्री के नाम पर गरीबों के लिए चल रही योजना को शिकायतें, साक्ष्य और नाम सब कुछ उपलब्ध हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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