


डेस्क खबर बिलासपुर./ एक ओर सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं बिल्हा विधानसभा विकासखंड की ग्राम पंचायत देवकिरारी की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। यहां सड़कें नहीं, दलदल है; रास्ते नहीं, जलभराव है; और विकास नहीं, सिर्फ बदहाली नजर आती है। हालात ऐसे हैं कि छोटे-छोटे बच्चे रोज कीचड़ में गिरते हुए स्कूल पहुंचते हैं, कई ने तो गिरने और परेशानियों के डर से स्कूल जाना तक कम कर दिया है। बिल्हा विधानसभा से आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि इस क्षेत्र का जिम्मेदारों ने कितना विकास किया है ? ग्रामीणों ने विधायक को कहा भी यहां एक बार आकर नहा के तो देखिए ।
सबसे अधिक दयनीय स्थिति वार्ड क्रमांक 1, 4, 5 और 8 की बताई जा रही है। बरसात के बाद सड़कें पूरी तरह पानी और कीचड़ में डूब गई हैं। बुजुर्ग, महिलाएं, स्कूली बच्चे और मरीज रोज जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। देवकिरारी से बिटकुली जाने वाला मुख्य मार्ग भी बड़े-बड़े गड्ढों और जलभराव के कारण लोगों के लिए मुसीबत बन चुका है।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से विकास के नाम पर सिर्फ वादे हुए, लेकिन जमीनी हालात नहीं बदले। उनका कहना है कि गांव के विकास के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं और 15वें वित्त आयोग की राशि आई, लेकिन उसका लाभ गांव की सड़कों पर दिखाई नहीं देता। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विकास का पैसा गया कहां?

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायत में पिछले कई वर्षों से एक ही प्रभाव कायम है, लेकिन गांव की तस्वीर नहीं बदली। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि चुनाव के समय तो गांव पहुंचते हैं, लेकिन बदहाल सड़कों और ग्रामीणों की परेशानियां देखने के लिए शायद उनके पास समय नहीं है।

देवकिरारी की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उन सरकारी दावों पर भी सवाल है जिनमें हर गांव को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने की बात कही जाती है। आखिर कब तक ग्रामीण कीचड़ में जिंदगी जीने को मजबूर रहेंगे? कब तक मासूम बच्चे स्कूल जाने के लिए दलदल से लड़ते रहेंगे? और कब प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की नींद खुलेगी?

ग्रामीणों ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, विकास कार्यों के ऑडिट और तत्काल सड़क निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
