

डेस्क खबर बिलासपुर . जिले में शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन कोटा मुख्य मार्ग सकरी स्थित पेंडारी क्षेत्र का एक मामला इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रहा है। सकरी तहसील कार्यालय से लगे क्षेत्र में शासकीय छोटे झाड़ के जंगल की भूमि पर कथित अतिक्रमण और दोबारा निर्माण कार्य की चर्चा इन दिनों क्षेत्र में जोरों पर है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, संबंधित भूमि पर विनोद सोनवानी द्वारा लाखों रुपये खर्च कर एक आलीशान मकान का निर्माण किया गया था। मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग ने जांच कर बेदखली की कार्रवाई की थी तथा जेसीबी के माध्यम से निर्माण के एक हिस्से को हटाया गया था। उस समय प्रशासन की कार्रवाई को शासकीय भूमि संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
हालांकि, क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बेदखली और तोड़फोड़ की कार्रवाई के कुछ माह बाद उसी स्थान पर फिर से निर्माण गतिविधियां शुरू हो गईं। बताया जा रहा है कि वर्तमान में वहां ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) एवं ग्रामीण सहकारी बैंक से संबंधित सेवाओं के नाम पर दुकान संचालित की जा रही है। साथ ही निर्माण कार्य को मेट और अन्य सामग्री से ढंककर आगे बढ़ाए जाने की भी चर्चा है।
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राजस्व विभाग पहले ही उक्त भूमि पर कार्रवाई कर चुका है, तब उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कैसे हो रहा है। लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ बेदखली आदेश पारित हो चुका है, तो उसके बाद दोबारा निर्माण कार्य होना प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि क्या संबंधित व्यक्ति को किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति प्राप्त है या फिर शासकीय भूमि पर पुनः कब्जा कर निर्माण किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में राजस्व विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देशन में जिलेभर में शासकीय भूमि को कब्जा मुक्त कराने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन द्वारा अनेक स्थानों पर अतिक्रमण हटाकर करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया है। ऐसे में पेंडारी का यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

अब लोगों की निगाहें राजस्व विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। देखना होगा कि क्या विभाग इस मामले में पुनः जांच कर बेदखली की फाइल खोलेगा, या फिर शासकीय छोटे झाड़ की भूमि पर कथित कब्जे का यह मामला यूं ही चलता रहेगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग भी तेज हो सकती है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है, पूर्व में की गई बेदखली कार्रवाई का रिकॉर्ड क्या कहता है तथा वर्तमान में वहां संचालित गतिविधियां किस आधार पर संचालित की जा रही हैं। लोगों का कहना है कि शासकीय भूमि की सुरक्षा और कानून के प्रति लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए इस मामले में शीघ्र एवं पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है।