डेस्क खबरबिलासपुर

पार्ट-46: राशन घोटाला—सरकारी दुकानों में नहीं थम रही कालाबाजारी, चावल के बदले नगद देने का खेल जारी ,!! 45 वीडियो खबरें देखे नहीं, फिर भी कुजूर बने फेंक न्यूज सोशल मीडिया के “सुपरवाइज़र” – पढ़िए और देखिए कैसे!




डेस्क खबर बिलासपुर../ प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर  जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में सरकारी राशन दुकानों में अनियमितताओं का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा मामला चावल के बदले नगद पैसा देने का है, जो अब भी खुलेआम चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस संबंध में कई पुख्ता वीडियो सामने आने के बावजूद खाद्य विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।जानकारी के अनुसार, गोंडपारा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 30 में संचालित “मां शक्ति प्रा उपभोक्ता भंडार” का संचालक एक बार फिर कैमरे में कैद हुआ है, जहां वह चावल के बदले नकद राशि देते नजर आया। इससे पहले भी इसी दुकान से जुड़ी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं,और पहले भी सरकारी राशन के बदले नगद पैसा देते हुए कैमरे में कई बार कैद है हो चुका लेकिन कार्रवाई के अभाव में संचालक के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। इस बार वीडियो में नगद के साथ शक्कर वितरण का मामला भी सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार दुकान किसी दीक्षित के नाम पर चलाने की अनुमति है लेकिन इस सरकारी राशन दुकान की किराए पर कोई और संचालित कर रहा है ।


वहीं, चावल विक्रेता संघ के अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय का नाम भी इस मामले में पहले से जुड़ा रहा है। मगरपारा क्षेत्र में महिला समिति के नाम पर संचालित दुकान में वे अपने बेटे के साथ सरकारी राशन के बदले नकद देते हुए कई बार कैमरे में कैद हो चुके हैं। विभागीय जांच के बाद उनकी दुकान को निलंबित किया गया था, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद फिर से वितरण शुरू हो गया। सूत्रों का दावा है कि ऋषि उपाध्याय द्वारा संचालित दुकान के संचालन के लिए विभाग में जमा किए गए दस्तावेजों की जानकारी लेकर यदि निष्पक्ष जांच की जाए तो बड़े स्तर पर चावल की हेराफेरी उजागर हो सकती है। साथ ही संबंधित समिति के पदाधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की भी संभावना जताई जा रही है।



इस बीच, जिला प्रशासन द्वारा फेक न्यूज पर निगरानी के लिए बनाई गई समिति की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब पुख्ता सबूतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही, तो अफवाहों पर नियंत्रण कितना प्रभावी होगा—यह एक बड़ा प्रश्न बन गया है। जबकि इस समिति में डिप्टी कलेक्टर,सायबर रेंज से लेकर पत्रकारों सहित खुद खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर इस निगरानी समिति में शामिल है ।





बिलासपुर जिले में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और उर्वरक की अफवाहों पर निगरानी के लिए बिलासपुर कलेक्टर के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने विशेष समिति बनाई है। अध्यक्ष हैं अपर कलेक्टर शिव कुमार बनर्जी, और सचिव बने हैं कुजूर – जो अब सोशल मीडिया की अफवाहों पर नकेल कसने वाले हैं।



लेकिन असली मज़ा यह है कि कुजूर जी अपने ऑफिस की कुर्सी पर बैठे-बैठे, अपने विभाग में हो रही अनियमितताओं के 40 से अधिक वीडियो एपिसोड भी नहीं देख पाए। हाँ, सही सुना आपने 45 वीडियो! जैसे विभाग की हर हरकत कुर्सी के नीचे छुप गई हो और कुजूर जी की नजरों से बच गई हो।=समिति के अन्य निरीक्षक अब कुजूर की इस “विशेष निगरानी क्षमता” को देखकर हँस रहे हैं – “भाई, सोशल मीडिया अफवाह रोकनी है या वीडियो देखना है?”=स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यह भी नहीं पता कि चावल चोरी में शामिल लोग आखिर किसके संरक्षण में काम कर रहे हैं। 45 वीडियो एपिसोड और रिपोर्टिंग के बाद भी कुजूर जी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।तो अब जनता सोच रही है – सोशल मीडिया की अफवाहों पर नकेल कसने के लिए कुर्सी पर बैठे कुजूर कितने “सुपरवाइज़र” साबित होंगे, जब अपने विभाग की खबरें उनके सामने भी “नज़र नहीं आईं”। वही इस मामले में वरिष्ठ पत्रकारों और जानकारों का मानना है कि इस मामले में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेकर मामले का सच उजागर किया जा सकता है और इसके लिए जल्द विभाग में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी जुटाने के लिए जल्द एक मुहिम शुरू की जा सकती है और सत्यापित दस्तावेज़ के साथ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है ताकि जिले में चावल की कालाबाजारी जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर लगाम लगाई जा सके .??

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