

डेस्क खबर ../ छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जांजगीर-चांपा जिले के कसौंदी गांव में टोकन न मिलने से परेशान एक किसान ने ऐसा कदम उठा लिया, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और किसानों की हकीकत को उजागर कर दिया। कर्ज के दबाव और लगातार अनदेखी से टूटे किसान अनिल गड़ेवाल शनिवार सुबह हाईटेंशन टॉवर पर चढ़ गए और धान बिकने तक नीचे न उतरने की जिद पर अड़ गए। किसान को कडी मशक्कत के बाद टावर से उतारते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है ।
जानकारी के मुताबिक, किसान अनिल गड़ेवाल पिछले कई दिनों से अपनी उपज बेचने के लिए टोकन कटवाने के प्रयास कर रहे थे। न तो समिति स्तर पर उनकी सुनवाई हुई और न ही प्रशासन से समय पर राहत मिली। परिजनों का कहना है कि किसान पर करीब डेढ़ लाख रुपये का बाहरी कर्ज है। तीन एकड़ जमीन में से एक हिस्से का धान बिक चुका है, लेकिन दूसरे हिस्से का टोकन अब तक नहीं कट पाया था। कर्ज चुकाने की चिंता और मानसिक तनाव ने किसान को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार, पटवारी, पुलिस बल और नगर सेना की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। करीब चार से छह घंटे तक किसान को समझाने का प्रयास किया गया। किसान की एक ही मांग थी कि पहले उसका धान बिके, तभी वह नीचे उतरेगा। आखिरकार रेस्क्यू टीम ने ऊपर चढ़कर किसान को आश्वासन दिया, जिसके बाद उसे सुरक्षित नीचे उतारकर जिला अस्पताल भेजा गया।

हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। किसान को आश्वासन देने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ अपराध दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। इस पर सवाल उठने लगे हैं कि जिस किसान ने अपनी समस्या बताने के लिए खतरनाक कदम उठाया, उसे राहत के बजाय कानूनी कार्रवाई क्यों झेलनी पड़ी।
गौरतलब है कि धान खरीदी का यह अंतिम दिन था और अब भी कई किसानों का धान नहीं बिक पाया है। एक किसान का टोकन काटकर व्यवस्था अपनी पीठ थपथपाती दिख रही है, लेकिन उन सैकड़ों किसानों का क्या, जो अब भी धान बिकने के इंतजार में कर्ज और चिंता के बोझ तले दबे हुए हैं?