डेस्क खबरबिलासपुर

आवेदक संतुष्ट, फिर भी दोबारा सीमांकन से उठे सवाल .!  तहसीलदार प्रकाश साहू की मनमानी की प्रशासनिक गलियारों में चर्चा !  नियमों को ताक पर रख बीजेपी नेता, पूर्व पार्षद को न्यायधानी में किया जा रहा है परेशान .!!

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डेस्क खबर बिलासपुर ../ प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर तहसील में सीमांकन प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करबला स्थित भूमि के सीमांकन से संतुष्ट होने के बावजूद वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व पार्षद शिव प्रताप साव को तहसीलदार प्रकाश साहू के निर्देश पर पुनः टीम सीमांकन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इस पूरे मामले को तहसीलदार की मनमानी और प्रकरण को अनावश्यक रूप से उलझाने की कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।



राजस्व नियमों के अनुसार भूमि की नाप-जोख एवं सीमांकन का दायित्व राजस्व निरीक्षक और पटवारी का होता है। उनकी रिपोर्ट तहसील कार्यालय में जमा होने के बाद तहसीलदार का कार्य उसे नस्ती कर सीमांकन रिपोर्ट जारी करना होता है। लेकिन आरोप है कि बिलासपुर तहसील में तहसीलदार प्रकाश साहू की पदस्थापना के बाद सीमांकन और नामांतरण जैसे मामलों में अनावश्यक विलंब और बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। आवेदक शिव प्रताप साव का कहना है कि 15 अक्टूबर 2025 को सात सदस्यीय आरआई–पटवारी टीम द्वारा उनकी भूमि का विधिवत सीमांकन किया गया, जिससे वे पूर्णतः संतुष्ट थे, बावजूद इसके उन्हें सीमांकन रिपोर्ट नहीं दी गई।


आवेदक की भूमि मौजा जूना बिलासपुर हल्का अंतर्गत करबला स्थित खसरा नंबर 275/2, रकबा 0.1130 हेक्टेयर है, जो विधिवत उनके नाम पर दर्ज है। सीमांकन के दौरान यह पाया गया कि खसरा नंबर 277 के भूमि स्वामी चिमन रावलानी द्वारा खसरा नंबर 275 के एक हिस्से पर कब्जा किया गया है। आरोप है कि चिमन रावलानी ने गलत जानकारी देकर नगर निगम से भवन नक्शा भी पास कराया है। सीमांकन में यह तथ्य सामने आने के बाद उन्होंने तहसील कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराई, जिसे तहसीलदार द्वारा स्वीकार कर लिया गया।


सबसे विवादास्पद पहलू यह है कि खसरा नंबर 275 के सीमांकन में खसरा नंबर 277 के भूमि स्वामी की आपत्ति को स्वीकार कर लिया गया, जबकि नियमानुसार अलग खसरे की आपत्ति सीमांकन प्रक्रिया में मान्य नहीं होती। इसके बावजूद तहसीलदार ने 12 दिसंबर को पुनः दल सीमांकन का नोटिस जारी कर दिया। 2 जनवरी को जब नई टीम मौके पर पहुंची तो सीमांकन की प्रक्रिया अधूरी रही। आरोप है कि तहसीलदार के फोन के बाद टीम ने कार्य रोक दिया और केवल औपचारिकता निभाते हुए पंचनामा तैयार कर लिया।



आवेदक के पुत्र अवनीश साव ने बताया कि टीम द्वारा खसरा नंबर 275 की चारों दिशाओं से नाप नहीं की गई, जिसके चलते उन्होंने पंचनामा पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। उनका आरोप है कि तहसीलदार जानबूझकर उनकी भूमि को विवादित बना रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने बिलासपुर तहसील की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है और अब यह मामला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि राजस्व नियमों को ताक में रखकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व पार्षद को परेशान करने वाले तहसीलदार के खिलाफ प्रदेश की विष्णु देव सरकार क्या एक्शन लेती है .??

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