
डेस्क खबर बिलासपुर ../ पत्रकारों के सम्मान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए रायगढ़ प्रेस क्लब ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अडानी समूह के विज्ञापनों का बहिष्कार कर मिसाल पेश की है । दरअसल, कुछ दिन पहले जिला न्यायालय परिसर में अडानी कंपनी के गुर्गों द्वारा पत्रकारों के साथ अभद्रता और जान से मारने की धमकी का मामला सामने आया था। इस घटना ने न केवल पत्रकारिता जगत को झकझोर दिया बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधे हमले की तरह महसूस हुआ। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों द्वारा सच उजागर किया जाता है जिसके बाद पत्रकारों के खिलाफ चंद लोग आघात और गुंडागर्दी करते हुए पत्रकारिता को बदनाम करते है ।

इस शर्मनाक घटना के बाद प्रेस क्लब ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। पुलिस की उदासीनता से नाराज प्रेस क्लब ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अडानी समूह के सभी विज्ञापनों और समाचारों का सामूहिक बहिष्कार करने का बड़ा फैसला लिया। परिणामस्वरूप रायगढ़ सहित जिले के किसी भी अखबार, चैनल और पोर्टल पर 15 अगस्त को अडानी का एक भी विज्ञापन प्रकाशित या प्रसारित नहीं हुआ। प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया कि यह केवल अपमान का जवाब नहीं है, बल्कि खनन के खेल में छिपे सच को उजागर करने की शुरुआत है। पत्रकारों का कहना है कि धमकाकर सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता। अब मीडिया अडानी समूह की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा—चाहे वह अवैध खनन हो, पर्यावरणीय उल्लंघन हो या प्रशासनिक मिलीभगत। यह निर्णय अडानी समूह के अहंकार पर करारा प्रहार माना जा रहा है। रायगढ़ ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ में इस ऐतिहासिक बहिष्कार के असर को लेकर उत्सुकता है, जहां मीडिया अपनी कलम को हथियार बनाकर सत्ताधारियों और पूंजीपतियों के दबदबे को खुली चुनौती दे रहा है। माना जा रहा देश की जाने माने उद्योगपति के इस बहिष्कार से छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के हितों से जुड़े संगठन सीख लेगे और राज्य के जिलों में प्रशासनिक और पुलिस के आतंक के खिलाफ मोर्चा खोल सच को बिना भय के उजागर करेंगे और निष्पक्षता से भ्रष्टाचार उजागर करेंगे । पर इतना जरूर है कि रायगढ़ प्रेस क्लब के इस ऐतिहासिक निर्णय ने पत्रकारिता के लिए एक अनोखी मिसाल पेश की है । अब देखना होगा कि राज्य के अन्य जिलों शहर के प्रेस क्लब संगठन इससे क्या सीख लेते है या सिर्फ ज्ञापन देकर औपचारिकता निभाते है ।

