डेस्क खबरबिलासपुर

गरीबों के हक की जमीन पर रसूखदार का कब्जा! खम्हरिया पंचायत की चार दुकानों के आवंटन पर उठे सवाल, अब व्यापारी को नोटिस थमाने की तैयारी में पंचायत !!



डेस्क खबर बिलासपुर../  मस्तूरी जनपद पंचायत के खम्हरिया गांव में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए निर्धारित जमीन पर बनी चार दुकानों के आवंटन को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के नियमों को दरकिनार कर मुख्य मार्ग पर स्थित इन दुकानों का लाभ रसूखदार कारोबारी पंकज अग्रवाल, उनकी पत्नी और मड़ई गांव के दो अन्य व्यक्तियों को दिया गया। आरोप यह भी है कि आवंटन के बाद चारों दुकानों का संचालन एक ही कारोबारी कर रहा है।


पंचायत की जमीन पर बनी दुकानों का उद्देश्य गांव के नाई, धोबी, लोहार, मोची सहित आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को रोजगार और आजीविका का अवसर उपलब्ध कराना बताया जाता है। लेकिन खम्हरिया में इन दुकानों के आवंटन को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, दुकानों में छड़, सीमेंट और बिल्डिंग मटेरियल का कारोबार संचालित किया जा रहा है।


दूसरी पंचायत के लोगों को आवंटन, नियमों पर सवाल
ग्रामीणों का दावा है कि दुकानों का आवंटन दूसरे गांव के लोगों के नाम पर किया गया, जबकि इन दुकानों के लिए स्थानीय पात्र हितग्राहियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। आरोप है कि आवंटन के बावजूद चारों दुकानों का व्यावसायिक लाभ एक ही कारोबारी उठा रहा है। हालांकि, आवंटन के दस्तावेजों और वास्तविक कब्जे की आधिकारिक जांच होना अभी बाकी है।


कोरबा में एग्रीमेंट, खम्हरिया की दुकानों पर कारोबार!
इस मामले में एक और सवाल सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, दुकानों से संबंधित एग्रीमेंट कोरबा जिले में किया गया था, जिसकी अवधि वर्ष 2025 में समाप्त होने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा है, तो एग्रीमेंट की शर्तों, उसकी वैधता और दुकानों के वर्तमान उपयोग की जांच जरूरी हो जाती है।
सरपंच बोले—गलत पाया गया तो होगी कार्रवाई
मामला पंचायत के जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में आने के बाद अब कार्रवाई की तैयारी की बात कही जा रही है। खम्हरिया के सरपंच का कहना है कि यह मामला उनके कार्यकाल से पहले का है। यदि नियमों के विरुद्ध दुकानों का आवंटन हुआ है, तो यह गलत है। उन्होंने संबंधित कारोबारी को पंचायत के माध्यम से नोटिस जारी करने और मामले की जांच कराने की बात कही है।
सरपंच के मुताबिक, नियमों के तहत पात्र हितग्राहियों को दुकानें आवंटित करने के लिए इश्तिहार जारी किया जाएगा। इसमें खम्हरिया पंचायत के स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की बात भी कही गई है। साथ ही, मामले की जानकारी जिले के उच्च अधिकारियों को देकर पंचायत अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई शुरू करने की बात कही गई है।


अब सबसे बड़ा सवाल—गरीबों के लिए निर्धारित जमीन का लाभ पात्र लोगों को मिला या रसूखदारों को?
खम्हरिया पंचायत की इन चार दुकानों के आवंटन से जुड़े दस्तावेज, एग्रीमेंट की शर्तें, वास्तविक कब्जे की स्थिति और आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। अब देखना होगा कि पंचायत प्रशासन केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रहता है या नियमों के अनुरूप जांच कर पात्र हितग्राहियों को उनका हक दिलाने की दिशा में ठोस कदम भी उठाता है और कितनी जल्दी नियमों के विपरीत आबंटित दुकानों को रसूखदार व्यापारी के कब्जे से खाली करवाता है ।
वही इस मामले में जानकारों का मानना है कि सीपत क्षेत्र के ग्राम पंचायत खमरिया में पारंपरिक व्यवसाय करने वाले वर्ग (नाऊ, धोबी, मोची आदि) के लिए आरक्षित या आवंटित व्यावसायिक दुकानों में नियमों की अनदेखी करके छड़-सीमेंट (हार्डवेयर) की दुकान खुलवाना एक गंभीर प्रशासनिक और कानूनी अनियमितता की श्रेणी में आता है।
यदि पंचायत ने शासन के नियमों, आवंटन की शर्तों या प्रस्ताव के विपरीत किसी अन्य व्यक्ति या व्यवसाय को यह दुकान आबंटित की है, तो मामला संज्ञान में आने के बाद ग्रामीण सहित पंचायत के वर्तमान सचिव ,सरपंच , पंच  वर्ग इसके खिलाफ वैधानिक कदम उठा सकते है। छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के नियमों के अनुसार, यदि पंचायत किसी विशिष्ट उद्देश्य (जैसे पारंपरिक शिल्पकारों/व्यवसायियों के उत्थान) के लिए फंड लेकर दुकान बनाती है, तो उसका उद्देश्य बिना उच्च अधिकारियों की अनुमति के बदला नहीं जा सकता।


क्या है आश्रम में कब्जे का राज और किसका मिला हुआ संरक्षण .?? मुहिम लगातार जारी रहेगी पुख्ता दस्तावेजों के साथ बड़ा खुलासा आगामी अंकों में भी..

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