



डेस्क खबर बिलासपुर ../ बिलासपुर-सीपत तहसील व मस्तूरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत खम्हरिया में पंचायत की दुकानों और औघड़ बाबा आश्रम से जुड़ी जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने दुकानों के अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बावजूद कारोबार जारी रहने तथा आश्रम की जमीन पर कथित कब्जे को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर पंचायत की संपत्तियों की स्थिति स्पष्ट करने और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

एग्रीमेंट खत्म, फिर भी हनुमान ट्रेडर्स का संचालन
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की दुकान पूर्व में अनुबंध के आधार पर दी गई थी, लेकिन अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद भी वहां हनुमत ट्रेडर्स का कारोबार संचालित हो रहा है। लोगो कहना है कि यदि अनुबंध की अवधि समाप्त हो चुकी है, तो पंचायत को नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। पात्र गरीबो लोगों को अवसर देने के लिए नियमानुसार नीलामी या अन्य वैधानिक प्रक्रिया पर भी विचार किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने इस मामले में पंचायत के जिम्मेदारों की भूमिका और अब तक की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।

गरीब दुकानदार को हटाने के बाद कब्जे का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, पहले इसी स्थान पर गांव का एक आर्थिक रूप से कमजोर जो पंचायत मे पदाधिकारी था जो व्यक्ति छोटी दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। आरोप है कि उसे दुकान से हटवा दिया गया, जबकि बाद में उसी स्थान पर हनुमत ट्रेडर्स का कारोबार शुरू हो गया। ग्रामीणों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में प्रभाव और दबाव का इस्तेमाल किया गया। ऐसे में यह जांच का विषय है कि दुकान किस प्रक्रिया के तहत खाली कराई गई और वर्तमान संचालन के लिए क्या वैधानिक अनुमति या अनुबंध मौजूद है। जो
औघड़ बाबा आश्रम की जमीन भी जांच के घेरे में
मामला केवल पंचायत की दुकान तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने औघड़ बाबा आश्रम और उससे लगी जमीन पर भी कथित कब्जे को लेकर चिंता जताई है। आरोप है कि पूर्व सैन्यकर्मी और उनके परिजनों सहित कुछ लोगों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम से जुड़ी भूमि के स्वामित्व, सीमांकन और वर्तमान उपयोग की जांच राजस्व विभाग के माध्यम से कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
दावा किया जा रहा है कि दुकान के अनुबंध की अवधि बढ़ाने, नीलामी से बचने और मामले को अपने पक्ष में रखने जैसे विषयों प्रभावशली लोगो द्वारा लेनदेन कर कब्जा करवाया गया है जिसकी निष्पक्ष जांच कर संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने पंचायत के दस्तावेजों, अनुबंध, प्रस्तावों और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई की जांच कराने की मांग की है।
मूलभूत सुविधाओं की कमी पर भी नाराजगी
ग्रामीणों ने गांव की सड़कों, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि एक ओर ग्रामीण सुविधाओं के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर पंचायत की संपत्तियों के उपयोग और प्रबंधन को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, सीपत तहसील और जनपद पंचायत मस्तूरी से मांग की है कि पंचायत की दुकान के अनुबंध एवं आवंटन संबंधी दस्तावेजों की जांच कराई जाए, नियमानुसार नीलामी या अन्य वैधानिक प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाए तथा औघड़ बाबा आश्रम की जमीन का सीमांकन कराकर कथित कब्जे की वास्तविकता स्पष्ट की जाए। साथ ही, यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत अथवा लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि पंचायत की संपत्तियों के उपयोग और आवंटन के नियमों का पालन हुआ या नहीं? ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासनिक जांच से पूरे मामले की वास्तविकता सामने आएगी और पात्र लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
अगले अंक में इस दुकान से जुड़ा चौंकाने वाला खुलासा नाम के साथ
