

डेस्क खबर बिलासपुर ./ जिले में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवालों का घेरा लगातार गहराता जा रहा है। एक तरफ होटल-ढाबों में बैठाकर शराब पिलाने के वीडियो और खबरें लगातार सामने आती रहती है और सरकारी शराब दुकानों के आसपास आबकारी संरक्षण में चखना दुकानों के संचालन की शिकायतें हैं, तो दूसरी तरफ बिल्हा क्षेत्र में आबकारी विभाग की कथित कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगे हैं। हालात ऐसे हैं कि शिकायतों का जवाब तलाशने कई बार आबकारी दफ्तर पहुंची मीडिया को आबकारी कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं मिले। जो मिलते भी है वह अपना पल्ला झाड़ पूरा ठीकरा सहायक आबकारी आयुक्त पर फोड़ देते है और साहब जिले में चल रही अवैध शराब की गतिविधियों पर बात करना नहीं चाहते है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही बिल्हा क्षेत्र में एक परिवार ने आरोप लगाया है कि गांजे के अवैध कारोबार के संदेह में तड़के करीब 4 बजे कुछ लोग उनके घर पहुंचे और तलाशी ली। पीड़ित पक्ष का दावा है कि इस दौरान घर से 40 हजार रुपये नकद, मोबाइल फोन और सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर ले जाया गया। परिवार ने 50 हजार रुपये की मांग और दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए हैं। इस मामले में आबकारी विभाग की एक महिला अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पीड़ित परिवार के आरोपों से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया में जमकर ट्रोल हुआ जिम्मेदार अधिकारियों तक भी पहुंचा लेकिन उसके बाद भी अब तक गंभीर मामले में आबकारी विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
जिले के अलग-अलग इलाकों में होटल और ढाबों पर बैठाकर शराब पिलाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ वीडियो वायरल होने के दावे भी किए जा रहे हैं। वहीं, निर्धारित समय के बाद भी बार खुले रहने और सरकारी शराब दुकानों के आसपास चखना दुकानों के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सहायक आयुक्त आबकारी की ओर से शराब दुकानों के आसपास संचालित चखना दुकानों को बंद कराने का दावा किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद पुराने बस स्टैंड, स्वदेशी शराब दुकान और अन्य स्थानों के आसपास ऐसी दुकानों के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब बड़ा सवाल यही है कि बिल्हा की कथित कार्रवाई में क्या हुआ, नकदी और सामान ले जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है और ढाबों-चखना दुकानों पर कार्रवाई क्यों नहीं दिख रही? और देर रात तक जिले के बार तय सीमा के बाद भी किसके संरक्षण में चल रहे है .?? इन सवालों का जवाब आबकारी विभाग को देना चाहिए, क्योंकि सवाल सिर्फ शराब के अवैध कारोबार का नहीं, बल्कि नियम लागू कराने वाले विभाग की जवाबदेही का भी है।
