डेस्क खबरबिलासपुर

पुलिस की लापरवाही : नाबालिक बेटी की हत्या के आरोपी बाहर, अब मां-बाप को सता रहा डर! मुंगेली पुलिस की जांच पर उठे गंभीर सवाल…आखिर पुलिस ने जांच में ऐसी कौन-सी चूक की कि आरोपियों की रिमांड ही निरस्त हो गई ..


डेस्क खबर बिलासपुर ,/ मुंगेली ../ जिस बेटी को मां-बाप ने बड़े लाड़-प्यार से पाला, जिसके बेहतर भविष्य के सपने देखे, आज उसी बेटी की हत्या के बाद परिवार न्याय के लिए भटक रहा है। बेटी तो दुनिया छोड़कर चली गई, लेकिन उसके मां-बाप का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा। अब परिवार का आरोप है कि हत्या के मामले में पकड़े गए आरोपी रिहा होने के बाद उन्हें धमका रहे हैं। आखिर बेटी खो चुके मां-बाप को न्याय के साथ सुरक्षा के लिए भी गुहार क्यों लगानी पड़ रही है?
मुंगेली में नाबालिग की हत्या का मामला अब पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक तरफ परिवार ने अपनी नाबालिग बेटी को खो दिया, दूसरी तरफ आरोपियों की रिहाई के बाद अब परिजन खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि आरोपियों ने बाहर आते ही उन्हें धमकाया। आखिर यह कैसी व्यवस्था है, जहां न्याय की उम्मीद लेकर बैठे परिवार को अपनी सुरक्षा के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचकर गुहार लगानी पड़ रही है?


पुलिस की जांच में चूक हुई या कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ? यह सवाल अब मुंगेली पुलिस से पूछा जा रहा है। न्यायालय ने विवेचना में तकनीकी त्रुटि का उल्लेख करते हुए आरोपियों की रिमांड निरस्त कर उन्हें मुचलके पर रिहा किया है। ऐसे में पुलिस की जांच प्रक्रिया की गंभीरता से समीक्षा जरूरी है। अगर विवेचना में खामियां थीं, तो उन्हें समय रहते दूर क्यों नहीं किया गया? क्या जांच के दौरान जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया गया था? इन सवालों पर पुलिस को जवाब देना चाहिए।
हत्या का आरोप, फिर भी परिवार को सता रहा डर!
मामला मुंगेली सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम नेवासपुर का है। जानकारी के मुताबिक, 19-20 अक्टूबर की दरम्यानी रात एक नाबालिग की गला दबाकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि ग्राम लीलवाकापा निवासी अजीत घृतलहरे ने दूसरे युवक से बातचीत के संदेह में वारदात को अंजाम दिया। साहिल खांडे पर भी सहयोग करने का आरोप है।
पुलिस ने मृतिका के दादा की शिकायत पर जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। लेकिन विवेचना में तकनीकी त्रुटि के चलते उनकी रिमांड निरस्त होने के बाद मामला नए सवालों के घेरे में आ गया है।
अब परिजनों का आरोप है कि आरोपियों की रिहाई के बाद उन्हें धमकियां दी गईं। इसी डर के चलते मृतिका के परिजन, सरपंच और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और न्याय की मांग की।लेकिन पुलिस की विवेचना में तकनीकी खामी का उल्लेख करते हुए न्यायालय ने उनकी रिमांड निरस्त कर उन्हें मुचलके पर रिहा कर दिया। आरोपियों की रिहाई की सटीक तारीख की पुष्टि नहीं हुई है। यहां सबसे बड़ा सवाल मुंगेली पुलिस की जांच पर है। अगर विवेचना में तकनीकी खामियां थीं, तो उन्हें समय रहते दूर क्यों नहीं किया गया? क्या जांच में जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन हुआ? इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि दो दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा।अब मुंगेली पुलिस को जवाब देना होगा कि जांच में हुई चूक दूर करने और पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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