


डेस्क खबर बिलासपुर../ शहर की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब भाजपा के वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने बिना नाम लिए पूर्व विधायक शैलेष पांडे पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। खेल प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों और गणमान्य नागरिकों के बीच आयोजित संवाद कार्यक्रम में अमर अग्रवाल ने विकास बनाम बयानबाजी की राजनीति का मुद्दा उठाते हुए ऐसा व्यंग्य किया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी।
अपने संबोधन में अमर अग्रवाल ने कहा, “शेर की नाक का बाल और गधे की पूंछ के बाल में फर्क होता है… और जनता अब यह फर्क अच्छी तरह समझ चुकी है।” इस एक वाक्य को राजनीतिक हलकों में विपक्ष पर सीधा और अब तक का सबसे करारा तंज माना जा रहा है।
उन्होंने विधानसभा की भूमिका पर भी विस्तार से बात करते हुए कहा कि सदन केवल सवाल पूछने का मंच नहीं, बल्कि कानून बनाने, बजट पारित करने और प्रदेश के विकास की दिशा तय करने का सर्वोच्च मंच है। उनके मुताबिक, सवाल तभी सार्थक हैं जब उनका परिणाम जनता के हित में दिखाई दे, केवल सुर्खियां बटोरने के लिए नहीं।
बिना नाम लिए पूर्व विधायक पर निशाना साधते हुए अमर अग्रवाल ने कहा, “अगर 392 सवाल पूछने से ही विकास होता, तो जनता रिकॉर्ड मतों से जवाब नहीं देती। जनता ने बता दिया कि उसे आंकड़ों की राजनीति नहीं, परिणाम की राजनीति चाहिए।”
उन्होंने कहा कि 25 वर्षों के विधायक और 15 वर्षों के मंत्री कार्यकाल में उनका उद्देश्य सदन में केवल बोलना नहीं, बल्कि बिलासपुर के लिए योजनाएं, बजट और विकास कार्य स्वीकृत कराना रहा। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा कार्यकाल में बजट से पहले ही बिलासपुर को करीब ₹2,500 करोड़ की विकास परियोजनाएं मिली हैं, जबकि शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ₹300 करोड़ की सड़क परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं।
अमर अग्रवाल ने एक और तीखा तंज कसते हुए कहा, “बिलासपुर को घुटनों तक पानी में खड़े होकर छाता लेकर भाषण देने वाला नेता नहीं, बल्कि फाइलों से विकास निकालने वाला कर्मयोगी चाहिए।” इस टिप्पणी को भी उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर सीधा हमला माना जा रहा है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि वे किसी नेता को जवाब देने के लिए राजनीति नहीं करते। उनकी जवाबदेही केवल बिलासपुर की जनता के प्रति है और अंतिम सांस तक शहर की सेवा करना ही उनका संकल्प रहेगा।
अमर अग्रवाल के इस बयान के बाद बिलासपुर की राजनीति में बयानबाजी का नया दौर शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि इस सियासी वार का जवाब कब और किस अंदाज में दिया जाता है।