



डेस्क खबर बिलासपुर./ बिलासपुर में दशहरे पर रावण के दस सिर जलाने के लिए आतिशबाजी हुई, लेकिन बिलासपुर में दो जगह हुए हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। पुलिस ग्राउंड में पत्रकार राकेश मिश्रा और शेख अशलम सहित कुछ लोगों के झुलसने की खबर आई, तो बेलतरा के साइंस कॉलेज मैदान में रॉकेट फटने से अफरा-तफरी मच गई। हैरानी की बात है कि जिम्मेदार अफसरों की मौजूदगी और जनप्रतिनिधियो की मौजूदगी में लापरवाही के चलते रावण दहन के आयोजन में हादसे हो गए, लेकिन उसके बाद तक अभी तक किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे है यदि कोई गंभीर हादसा हो जाता और भगदड़ मच जाती तो जिम्मेदार कौन होता ? पुलिस ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में विधायक अमर अग्रवाल, महापौर पूजा विधानी, कलेक्टर, एसपी, पत्रकार और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद थे। वहीं, साइंस कॉलेज मैदान के आयोजन में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू शामिल हुए। तमाम सुरक्षा दावों के बीच लापरवाही की सामने आई तस्वीरों ने पूरी कलाई खोल कर रख दी है।
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने दोनों घटनाओं को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। ठेका प्रक्रिया से जुड़े लोगों के प्रभाव और राजनीतिक संबंधों के कारण कार्रवाई प्रभावित होने की आशंकाएं भी जताई गई हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और दस्तावेजों से ही हो सकती है।
अब सवाल है कि प्रशासन दोनों घटनाओं की जांच की स्थिति सार्वजनिक करेगा या मामला फाइलों में ही सिमटकर रह जाएगा? यदि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक नहीं हुई, तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए। और यदि लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?
जनता की सुरक्षा से बड़ा कोई ठेका नहीं
दो अलग-अलग आयोजनों में हादसों की खबरों के बाद जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था, टेंडर की शर्तों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है। क्योंकि जनता को आतिशबाजी का तमाशा नहीं, अपनी सुरक्षा चाहिए!!
