डेस्क खबरबिलासपुर

डंकाराम EXCLUSIVE: गरीबों के निवाले पर चोरों की नजर! बलरामपुर से बिलासपुर तक PDS चावल में का खुला खेल  , कहीं कालाबाजारी तो कहीं बोरों में पानी डालने का खेल!  सिस्टम सो रहा है, गरीबों के राशन पर कौन खेल रहा है खेल? सरकारी चावल की बंदरबांट पर कब होगी  कार्रवाई की गाज?


डेस्क खबर बिलासपुर ../  गरीबों के पेट की आग बुझाने के लिए सरकार राशन देती है, लेकिन इसी चावल के कारोबार में गड़बड़ी और कालाबाजारी के मामले से जुड़े हुए वीडियो और आरोप व्यवस्था की पोल खोल खोलते नजर आ रहे है। बलरामपुर जिले से लेकर प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर उठते सवाल बता रहे हैं कि गरीबों के हक की निगरानी में आखिर कहीं न कहीं गंभीर चूक की आशंका है। सवाल सिर्फ चावल का नहीं, उस भरोसे का है जो गरीब परिवार सरकारी राशन व्यवस्था पर करते हैं। प्रदेश के अन्य जिलो में चावल की गड़बड़ी की शिकायत मिलने और जांच में पुख्ता प्रमाण होने के बाद विभाग सरकारी राशन में सेंध मारने वालो चावल चोरों के खिलाफ प्रतिवेदन देकर एफआईआर दर्ज करवा रहा वही अन्य जिले के उलट बिलासपुर के चावल चोर मामला उजागर करने वालो के खिलाफ ही सिस्टम से तालमेल और साठगांठ कर झूठा मामला दर्ज करवा रहे है। बिलासपुर चावल विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय उसका बेटा सहित कई चावल चोर सरकारी योजना के चावल के बदले नगद पैसा देते हुए कैमरे में कैद भी हो चुके है। कई उचित मूल्य की दुकानें किराए में संचालित हो रही है तो महिला स्व सहायता समूह के नाम पर दर्ज दुकानों में महिलाओं की जगह पुरुष कामगार नजर आते है। कई नामचीन लोग एक साथ अलग अलग जगहों पर दो से ज्यादा दुकानों को संचालित कर रहे है। इतना ही नहीं एक रसूखदार व्यापारी तो परिवहन के नाम पर जीपीएस सिस्टम के जरिए शहर का आधा से ज्यादा सरकारी चावल इधर उधर कर अपना एक छत्र साम्राज्य स्थापित कर रोज की लाखों रु की अवैध कमाई कर रहा है।पूरा शहर शहर के बीचों बीच चल रहा जानकारी भी जिम्मेदारों को है लेकिन रसूख के कारण कार्यवाही नहीं हो पा रही है।




बिलासपुर में सरकारी चावल का खेल, निगरानी तंत्र पर सवाल!
बिलासपुर में आरोप हैं कि सरकारी चावल को छोटी ऑटो से लेकर बड़ी गाड़ियों तक के जरिए कथित तौर पर अवैध कारोबार में खपाया जा रहा है। राशन दुकानों से चावल उठने, रास्ते में उतारे जाने और राइस मिलों तक पहुंचने की तस्वीरें सामने आती भी रही है उसके बाद भी कार्यवाही नहीं होने  पूरे परिवहन तंत्र की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे है !



चावल विक्रेता संघ के अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय और उनके बेटे से जुड़े मामले में सरकारी चावल के बदले नकद भुगतान किए जाने के वीडियो भी सामने आ चुके है वीडियो सामने आने के बाद तत्कालीन खाद्य अधिकारी की जांच में भी दोषी ठहराया जा चुका है। लेकिन उसके बाद भी महिला समूह की दुकान में बड़े आराम से चावल चोरी का काम चल रहा हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब जरूरी है। यदि सरकारी राशन की खरीद-बिक्री में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए—चाहे उनका रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो।


सबसे बड़ा सवाल: GPS, परिवहन रिकॉर्ड और राशन वितरण के आंकड़े मौजूद हैं, तो सरकारी चावल की हर खेप का हिसाब सामने क्यों नहीं आना चाहिए? जिन दुकानों से चावल उठता है, वहां से लेकर अंतिम गंतव्य तक उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है?


डुमरखोरका में 84 बोरे गीले, आखिर चावल में पानी किसने डाला?
बलरामपुर जिले के डुमरखोरका की उचित मूल्य दुकान में चावल के बोरों को पानी से गीला करने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। ग्रामीणों का आरोप है कि रात में तालाब के पानी से चावल के कई बोरे भिगोए गए। सूचना पर जनप्रतिनिधि समीर सिंह देव और कार्यपालन अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार, जांच के दौरान 84 बोरों में से अधिकांश गीले पाए गए। दुकान संचालक लल्लू यादव पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मौके पर पंचनामा तैयार किया गया है। आशंका जताई जा रही है कि चावल का वजन बढ़ाने के लिए ऐसा किया गया हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक कारण विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। क्योंकि सवाल चावल के कुछ बोरों का नहीं, गरीब के हक का है। और जब गरीब के निवाले पर सवाल उठे, तो सिस्टम की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए!

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