



डेस्क खबर बिलासपुर ../ बिलासपुर शहर की जानी मानी होटल कोर्टयार्ड मैरियट में ग्राहकों को लुभावने और आकर्षक प्रभोंलन देकर ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली माल बेचने का मामला सामने आया है। कोर्टयार्ड मैरियट में लगी इस सेल में अपने साथ हुई ठगी और नकली कपड़े की शिकायत लेकर ग्राहक ने सिविल लाइन में शिकायत भी दी है। ने आयाज खान इंटरप्राइजेज के द्वारा ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर 80% छूट वाले ‘बिग ब्रांड सेल’ में नकली कपड़े खपाने का आरोप लगाते हुए दुकानदार के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है।सिविल लाइन थाने में मामला पहुंचते ही पुलिसिया कार्यवाही से बचने के लिए आयाज खान ने ग्राहक से समझौता करते हुए बिका हुआ माल वापिस लेते हुए पूरी रकम को लौटा कर समझौता कर लिया है। जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि बिलासपुर की जानी मानी हॉटल कोर्टयार्ड मैरियट में में यदि नकली माल बेचने और ग्राहकों को ठगने का मामला सामने आया है तो कोर्टयार्ड मैरियट प्रबंधन ने इसको गंभीरता से क्यों नहीं लिया और यदि आरोप सही है तो कंपनियों से जांच कराए बिना कैसे तय होगा असली-नकली का सच? और यदि सही में ब्रांड के नाम पर कापी माल बेच ग्राहकों को लुटा जा रहा है तो कार्यवाही करेगा कौन .??
ब्रांडेड कपड़ों पर 80 प्रतिशत तक छूट का प्रचार कर ग्राहकों को लूटने के आरोप के बाद अब सवाल है—क्या पैसे लौटाने से ब्रांडेड के नाम पर कथित तौर पर नकली माल बेचने के आरोपों की जांच की जरूरत खत्म हो जाती है?

तेलीपारा निवासी अनिमेश रजक ने 9 अक्टूबर को सिविल लाइन थाने में शिकायत की कि होटल कोर्टयार्ड मैरियट में लगे ‘बिग ब्रांड सेल’ से उन्होंने 8 अक्टूबर की रात अपने साथियों के साथ लॉकेस्ट्रेक, सीके, जारा, स्पायकर, बेनेटन, नाइकी, पेपे जींस और जॉकी के कपड़े खरीदे। मेसर्स अयाज खान इंटरप्राइजेज के नाम से 27,600 का जीएसटी बिल दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि घर पर मौजूद ब्रांडेड कपड़ों और बाजार में उपलब्ध उत्पादों से मिलान करने पर खरीदे गए कपड़े फर्स्ट कॉपी जैसे लगे। उन्होंने बिल की प्रतियां और कपड़ों की तस्वीरें पुलिस को सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी ।

शिकायत के बाद सेल के मैनेजर को थाने बुलाया गया। टीआई किशोर केवट के मुताबिक, मैनेजर ने कपड़े वापस लेकर रकम लौटाने की सहमति दी। दोनों पक्षों में समझौता हुआ और शिकायतकर्ता ने शिकायत वापस ले ली। पुलिस का कहना है कि यदि कंपनी के लोग या जिन ब्रांड के नाम पर सेल लगी है उसके डीलर शिकायत करते है तो मामले में पुलिस दखल दे सकती है ।

बिग ब्रांड सेल में बिल अयाज खान इंटरप्राइजेज के नाम से क्यों जारी हुआ? कपड़ों की प्रामाणिकता पर संदेह सामने आने के बाद संबंधित कंपनियों से सत्यापन क्यों नहीं कराया गया?
रकम की वापसी ग्राहक और विक्रेता के बीच विवाद सुलझा सकती है, लेकिन अपने आप में यह न तो कपड़ों के नकली होने का प्रमाण है और न ही उनके असली होने का। अब जरूरत इस बात की है कि उत्पादों की संबंधित कंपनियों से जांच कराई जाए और यह स्पष्ट हो कि छूट के नाम पर ग्राहकों को वास्तव में क्या बेचा जा रहा था। समझौता हो गया, लेकिन असली-नकली का सवाल अब भी कायम है। क्योंकि ग्राहक छूट के नाम पर विश्वास के साथ खरीदी करते है और बाद में पता चलता है कि ब्रांड के नाम पर माल नकली था ।

