


डेस्क खबर बिलासपुर रतनपुर। तालाबों की नगरी के नाम से पहचान रखने वाले रतनपुर में इन दिनों नगर पालिका की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। करीब 110 तालाबों का आबंटन लंबे समय से लंबित पड़ा है, जिससे एक ओर नगर पालिका को लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका है, तो दूसरी ओर मछुआरा समाज की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। जानकारी के अनुसार, करीब एक वर्ष पहले 64 तालाबों के ठेके के लिए निविदा जारी की गई थी। मछुआरों और समितियों ने आवेदन भी जमा किए, लेकिन आज तक आबंटन नहीं हो सका। इसके बाद 15 जून 2026 को 45 और तालाबों का ठेका भी समाप्त हो गया। इसके बावजूद नई नीलामी प्रक्रिया शुरू नहीं होने से नगर पालिका की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मछुआरा समुदाय का कहना है कि जून माह समाप्त होने वाला है और जुलाई से मछली पालन का महत्वपूर्ण सीजन शुरू हो जाता है। इसी अवधि में तालाबों में मत्स्य बीज डालने और पालन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है। समय पर आबंटन नहीं होने से मछुआरे आर्थिक नुकसान की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो पूरे वर्ष का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
दूसरी ओर नगर पालिका को भी राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ तालाब प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों और रसूखदार लोगों के कब्जे या नियंत्रण में हैं, जिसके कारण नियमित नीलामी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तालाबों के आबंटन में देरी के पीछे प्रशासनिक लापरवाही है, तकनीकी अड़चन है या फिर कोई “सेटिंग” का खेल चल रहा है।
नगरवासियों और मछुआरा समाज ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन इस मामले में स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करे तथा लंबित तालाबों की नीलामी प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर राजस्व हानि को रोके। अब देखना यह होगा कि नगर पालिका इन सवालों का जवाब कब देती है और तालाबों के आबंटन की प्रक्रिया कब शुरू होती है।
प्रमुख सवाल
एक वर्ष पहले निकाली गई 64 तालाबों की निविदा का क्या हुआ?
110 तालाबों का आबंटन अब तक क्यों नहीं हो पाया?
नगर पालिका को हो रहे राजस्व नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या कुछ तालाबों को प्रभावशाली लोगों के हित में रोका गया है?
मछुआरों को समय पर तालाब नहीं मिलने से होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
यह मामला अब नगर पालिका की कार्यप्रणाली और राजस्व प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
वही सूत्रों का दावा है कि तालाब आबंटन नहीं होने के बाद भी तालाबो से मछलिया निकाली जा रही है और चर्चित चेहरे इसका स्वाद के साथ अपनी जेब भी गर्म कर रहे है ।