
डेस्क खबर,बिलासपुर../ रोते-बिलखते मां-बाप अपने बेटे के साथ बिलासपुर के नेहरू चौक पहुंचे। आरोप था कि आबकारी विभाग की कार्रवाई के नाम पर पहले 5 हजार लिए गए और तीन महीने बाद फिर कार्यालय बुलाकर 5 हजार की मांग की गई। पैसे नहीं देने पर बेटे से कथित मारपीट और मोबाइल छीनने के आरोप भी परिवार ने लगाए। न्याय की गुहार लगाते परिवार ने मीडिया से मदद मांगी।मामले की सच्चाई जानने मीडिया आबकारी कार्यालय पहुंचा तो कैमरे के सामने एक महिला आरक्षक मीडियाकर्मियों से ही बहस करती नजर आई। आरोप है कि वह खुद को पत्रकार बताते हुए सवालों का जवाब देने के बजाय मीडिया को ही धौंस दिखाने लगी। मौके पर बड़े अधिकारी मौजूद थे और पूरे मामले को शांत कराने तथा कथित तौर पर समझौते की कवायद करते नजर आए।
सवाल यह है कि बिना वर्दी महिला आरक्षक किस हैसियत से वहां मौजूद थी? क्या उसे मीडिया से उलझने और सवालों का जवाब देने की जिम्मेदारी दी गई थी?
उधर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। शहर के बारों के निर्धारित समय के बाद तक खुले रहने, सरकारी शराब दुकानों के आसपास अहाता और चखना सेंटरों की भरमार तथा गांव-गांव अवैध शराब के कारोबार को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप तो यहां तक हैं कि कथित चखना सेंटरों से रोजाना 100 से 1000 तक की वसूली होती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय जांच जरूरी है।
अब सबसे बड़ा सवाल—जब गरीब परिवार इंसाफ मांग रहा था, तब जवाब देने के बजाय मीडिया से बहसबाजी क्यों?
क्या आबकारी विभाग अपने ही कर्मचारियों और कथित वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा? क्या सीसीटीवी फुटेज और पूरे घटनाक्रम की जांच होगी? या फिर समझौते की कोशिशों के बीच गरीब की आवाज एक बार फिर दबा दी जाएगी?
सवाल गंभीर हैं, जवाब आबकारी विभाग को देना होगा। जबकि विभाग के जानकारों का कहना है कि बिना वर्दी के असफरों के सामने सिविल सेवा आचरण अधिनियम का सीधा उल्लंघन है और इतना ही नहीं सिर्फ डिस्पोजल और पानी के पाहुच के आधार पर कार्यवाही नहीं की जा सकती है उसके बाद भी आबकारी विभाग की मनमानी जारी है।
दयालबंद मधुबन के रामचरण मानिकपुरी के परिवार का आरोप है कि करीब तीन महीने पहले घर की जांच के बाद ₹5 हजार नकद लिए गए और ब्लैंक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए।
गुरुवार को परिवार को फिर आबकारी कार्यालय बुलाया गया। आरोप है कि वहां चालान के नाम पर दोबारा ₹5 हजार मांगे गए। पैसे देने में असमर्थता जताने पर युवक जयशु के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। परिवार का आरोप है कि वीडियो बनाने पर उसका मोबाइल भी छीनने की कोशिश की गई।पीड़ित परिवार का कहना है कि गुरुवार दोपहर आबकारी कार्यालय से कमलेश देवांगन का फोन आया और बताया गया कि “साहब ने बुलाया है।” इसके बाद रामचरण मानिकपुरी पत्नी जगिया बाई और बेटे जयशु के साथ आबकारी कार्यालय पहुंचे।परिवार के आरोप के मुताबिक कार्यालय में वेद नेताम द्वारा कथित तौर पर चालान पेश करने के नाम पर दोबारा 5 हजार की मांग की गई। पैसे देने में असमर्थता जताने पर विवाद बढ़ गया। जयशु ने कथित रूप से 500 निकालकर कहा कि उनके पास फिलहाल इतना ही है। इसके बाद परिवार का आरोप है कि जयशु को घसीटकर केबिन की ओर ले जाया गया और उसके साथ मारपीट की गई।
बेटे को बचाने पहुंचे माता-पिता के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई। परिवार का यह भी आरोप है कि जयशु ने घटना का वीडियो बनाने की कोशिश की तो उसका मोबाइल छीनने का प्रयास किया गया। मामला मीडिया तक पहुंचा तो सवालों की बौछार शुरू हो गई। आखिर तीन महीने बाद परिवार को दफ्तर क्यों बुलाया गया? चालान था तो वैधानिक प्रक्रिया और रसीद कहां है? पहले 5 हजार किस मद में लिए गए और अब दोबारा पैसे क्यों मांगे गए। वही कुछ मीडियाकर्मियों का दावा है कि आबकारी इंस्पेक्टर वेद नेताम का विवादों से पुराना नाता रहा है और कई मामलों में उनके समकक्ष अधिकारी लेनदेन के मामले को दबाने और मीडिया में खबर न दिखाने की सेटिंग भी करते है जबकि वेद नेताम के खिलाफ रिकॉर्डिंग के पुख्ता सबूत मौजूद है।
