डेस्क खबरबिलासपुर

पानी का प्रलय : बारिश ने खोली भ्रष्टाचार की परतें! करोड़ों डकारने वालों ने बिलासपुर को बना दिया तालाब, जनता बेहाल… बुजुर्ग महिला की मौत का जिम्मेदार कौन?



डेस्क खबर बिलासपुर ../ गुरुवार की रात को शुरू हुई बारिश और शुक्रवार की सुबह बिलासपुर जनता में मचे त्राहिमाम ने पहली ही मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर की सड़कों पर सिर्फ पानी नहीं बहाया, बल्कि नगर निगम, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के विकास के दावों को भी बहाकर रख दिया। जिन अधिकारियों और नेताओं ने हर साल नालों की सफाई, ड्रेनेज सुधार और जल निकासी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया, उनकी सारी तैयारियां पहली बारिश में ही ध्वस्त नजर आईं।


शहर की सड़कें तालाब बन गईं, नालों का गंदा पानी घरों तक पहुंच गया, कॉलोनियां जलमग्न हो गईं और हजारों लोग पूरी रात डर और परेशानी के बीच गुजारने को मजबूर रहे। कहीं बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हुआ, कहीं मरीज अस्पताल नहीं पहुंच सके, तो कहीं लोगों को अपने ही घरों से बाल्टी भर-भरकर पानी निकालना पड़ा। इतना ही नहीं बिलासपुर के हर क्षेत्र में यातायात व्यस्था भी पूरी तरह ठप्प रही यातयात विभाग और जिला प्रशासन सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को सलाह देता रहा और लोग जलभराव के चलते जाम में फंसे रहे है ।

हालांकि इस दौरान जल भराव की विकट स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने आगमी आदेश तक स्कूलों को बंद करने का फरमान भी जारी कर दिया। लेकिन इन सबके बीच उफनते नाले में  काम के निकली लिंगियाडीह निवासी बुजुर्ग महिला की  प्रमिला की पानी के तेज बहाव में बहने से दर्दनाक मौत हो गई। जिसके बाद सवाल खड़े हो रहे जिम्मेदारी की लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम के चलते बुजुर्ग महिला की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है ?


हर साल मानसून से पहले करोड़ों रुपये खर्च होने की फाइलें तैयार होती हैं, टेंडर निकलते हैं, भुगतान होते हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर वह पैसा गया कहां? यदि नालों की सफाई वास्तव में हुई होती तो पहली बारिश में शहर की यह दुर्दशा क्यों होती? जनता के टैक्स का पैसा आखिर किसकी जेब भर रहा है?


सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बारिश से पहले निरीक्षण, बैठकें और तैयारियों की तस्वीरें तो खूब जारी होती हैं, लेकिन जब जनता पानी में फंसती है तब न अधिकारी नजर आते हैं और न ही जनता के वोट से जीतकर सत्ता तक पहुंचे जनप्रतिनिधि। जनता सड़कों पर संघर्ष करती रहती है और जिम्मेदार लोग सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह जाते हैं।
अब सवाल केवल जलभराव का नहीं, बल्कि जवाबदेही का है। करोड़ों रुपये के मेंटेनेंस के बाद भी यदि शहर हर साल डूबता है, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर इस बदहाली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? जनता के पैसे की जवाबदेही कौन तय करेगा? और कब तक बिलासपुर के लोग हर बारिश में इसी भ्रष्ट व्यवस्था की कीमत अपनी जान और अपनी मेहनत की कमाई से चुकाते रहेंगे?जनता पूछ रही है— मेंटेनेंस के नाम पर खर्च हुए करोड़ों रुपये का हिसाब कौन देगा? और सबसे बड़ा सवाल है कि क्या प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा शहर वाकई जमीनी सच्चाई में अब तक सिर्फ एक बड़ा कस्बा ही नजर आ रहा है ?

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