डेस्क खबर

सरकारी राशन की 31 दुकानों का हिसाब कौन देगा? जांच, एफआईआर और रिकवरी के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं! आखिर किसके संरक्षण में मामला दबा है?



डेस्क खबर मुंगेली..,/ जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस की उचित मूल्य दुकानों में वर्ष 2024 के दौरान खाद्यान्न की कमी का मामला अब सरकारी कार्रवाई पर ही सवाल खड़े कर रहा है। भौतिक सत्यापन के दौरान जिले की 31 उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न की कमी पाए जाने की बात सामने आई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी, मुंगेली द्वारा जांच की गई और खाद्यान्न की कमी से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज कराने तथा रिकवरी करने के निर्देश भी जारी किए गए थे। लेकिन आरोप है कि निर्देश जारी होने के बावजूद आज तक इस मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।


यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच में कमी सामने आने और कार्रवाई के निर्देश जारी होने के बाद भी मामला किस स्तर पर अटका हुआ है? सरकारी राशन में कमी का मतलब सीधे तौर पर उस खाद्यान्न से जुड़ा मामला है, जो गरीब और जरूरतमंद हितग्राहियों तक पहुंचना था। ऐसे में यदि बड़ी मात्रा में खाद्यान्न की कमी हुई है और जिम्मेदारों से अब तक रिकवरी नहीं की गई, तो शासन को हुई कथित आर्थिक क्षति की भरपाई कौन करेगा? सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि वर्ष 2024 में सामने आई अनियमितता पर वर्ष 2026 तक कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी?


जब भौतिक सत्यापन में कमी सामने आई, जांच हुई और एफआईआर तथा रिकवरी के निर्देश भी जारी हुए, तो फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को और कितना इंतजार है? सबसे बड़ा सवाल यह है आखिर जांच रिपोर्ट के बाद भी चावल चोरों को किसका संरक्षण मिला हुआ है ??

error: Content is protected !!