14 गौवंश से भरी दो पिकअप पकड़ी, 2000 के चालान में छूटे तस्कर! ग्रामीणों ने पुलिस पर मिलीभगत का लगाया आरोप, घंटों भूखे-प्यासे रहे मवेशी ! पुलिसकर्मियों के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की मांग !



रिपोर्ट –अरविंद सिंह
डेस्क खबर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में गौवंश परिवहन को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दो पिकअप में कथित तौर पर ठूंस-ठूंसकर ले जाए जा रहे 14 गौवंश को ग्रामीणों ने पकड़ा, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामला दर्ज करने के बजाय महज 2 हजार रुपये का चालान काटकर वाहनों, चालकों और गौवंश को छोड़ दिया। मामला गौरेला थाना क्षेत्र की खोड़री चौकी अंतर्गत जोगीसार गांव, NH-45 का बताया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक दो पिकअप में गौवंश को क्रूरतापूर्वक भरकर ले जाया जा रहा था। ग्रामीणों ने दोनों वाहनों को रोककर पुलिस और 112 को सूचना दी, लेकिन आरोप है कि काफी देर तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची।
इसके बाद ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग को सूचना दी। आयोग के सदस्यों के पहुंचने पर कथित रूप से चालकों से परिवहन अनुज्ञा, वैध दस्तावेज और पशु चिकित्सा फिटनेस प्रमाणपत्र मांगे गए, लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि चालक कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।बाद में खोड़री चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों वाहनों को चौकी ले गई। यहीं से पूरा मामला सवालों के घेरे में आ गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि गौवंश के अवैध परिवहन और पशु क्रूरता से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने के बजाय मामले को केवल मोटर व्हीकल एक्ट तक सीमित कर दिया गया और 2 हजार रुपये का चालान काटकर वाहनों तथा मवेशियों को छोड़ दिया गया।सबसे गंभीर आरोप यह है कि करीब 8 घंटे तक बिना चारा-पानी के बंद रहे गौवंश का कथित तौर पर न तो मेडिकल परीक्षण कराया गया और न ही उन्हें सुरक्षित गौशाला भेजा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि GPM और MCB सीमा क्षेत्र में गौवंश परिवहन का यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। हालांकि पुलिस की कथित भूमिका और मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब बड़ा सवाल यह है कि अगर वाहनों में ले जाए जा रहे 14 गौवंश के पास वैध दस्तावेज नहीं थे, तो आखिर सिर्फ 2 हजार रुपये के चालान के बाद उन्हें क्यों छोड़ा गया? वही अब गौसेवकों ने इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच और कार्यवाही की मांग की है।














