शिकायत भी खुद, जांच भी खुद और चार्जशीट भी खुद! NDPS केस में हाईकोर्ट के सख्त सवालों से पुलिस जांच पर उठे गंभीर सवाल, DGP से व्यक्तिगत शपथ पत्र मांगा! ASI शैलेंद्र सिंह के पूर्व आचरण का मंगा ब्यौरा..



डेस्क खबर बिलासपुर../ बिलासपुर के सरकंडा थाने में दर्ज NDPS के एक मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ऐसा सवाल दागा है, जिसने पूरी कार्रवाई की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। जिस पुलिस अधिकारी के नाम से कथित देहाती नालिश दर्ज हुई, उसी अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी कैसे मिल गई और उसी ने आगे चलकर चार्जशीट भी दाखिल कर दी? चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए DGP को व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अधिकारी शैलेंद्र सिंह के पिछले आचरण से संबंधित जानकारी भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को होगी। गौरतलब है कि राज्य महिला आयोग ने भी जमकर इस पूरे मामले में सरकंडा पुलिस के ऊपर लगे आरोपों पर सवालिया सवाल खड़े किए थे।

पुलिस की जांच पर अदालत का सीधा सवाल
मामला सरकंडा थाना क्षेत्र में 2925 क्लोनाजेपाम यानी रिवोट्रिल टैबलेट की बरामदगी से जुड़ा है। पुलिस ने महिला के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और बाद में चार्जशीट भी पेश कर दी।
लेकिन हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जांच की प्रक्रिया ही कटघरे में आ गई।
कोर्ट ने DGP से जानना चाहा है कि जिस अधिकारी ने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज कराई, उसे ही जांच अधिकारी बनाकर उसी से जांच पूरी करवाने और चार्जशीट दाखिल कराने की अनुमति आखिर किस आधार पर दी गई?
यानी सवाल सिर्फ आरोपी महिला पर लगे आरोपों का नहीं, बल्कि पुलिस की जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता का भी है।
छत पर पतंग उड़ाते बच्चे को मिला था बैग
याचिकाकर्ताओं के अनुसार कहानी की शुरुआत एक 14 वर्षीय बच्चे से होती है। दावा है कि बच्चा छत पर पतंग उड़ा रहा था, तभी उसे एक पॉलीथिन बैग मिला।

मोबाइल पर जानकारी जुटाने के बाद बच्चे ने अपनी मां को बताया। परिवार का कहना है कि बैग को अनचाही वस्तु समझकर सीढ़ियों के पास कचरे वाली जगह पर रख दिया गया।
इसके बाद 15 फरवरी 2026 की सुबह करीब 7:35 बजे पुलिस घर पहुंची। छत की तलाशी में कुछ नहीं मिला, लेकिन सीढ़ियों के पास रखा वही बैग पुलिस ने बरामद कर लिया।
पुलिस के मुताबिक बैग से 2925 क्लोनाजेपाम टैबलेट, कुल वजन करीब 438.750 ग्राम, बरामद हुईं।
पारिवारिक विवाद ने बढ़ाया शक
महिला पक्ष ने पूरे मामले को पारिवारिक विवाद से जोड़ते हुए झूठा फंसाने की साजिश का आरोप लगाया है। याचिका के मुताबिक महिला का पति मेडिकल दुकान चलाता है और दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। भरण-पोषण, बच्चों की कस्टडी और तलाक समेत कई मामले भी बताए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कथित छापे से ठीक पहले महिला के पति और उसके एक रिश्तेदार की सरकंडा थाने में मौजूदगी भी जांच के घेरे में आनी चाहिए।
नाबालिग को 10 घंटे थाने में रखने का भी आरोप
मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक और गंभीर आरोप सामने आया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बच्चे के खिलाफ कोई FIR नहीं थी, फिर भी उसे करीब 10 घंटे थाने में बैठाकर रखा गया।
बच्चा कथित तौर पर पुलिस को लगातार बताता रहा कि बैग उसे छत पर मिला था और उसने ही उसे बाद में सीढ़ियों के पास रखा था।
याचिकाकर्ताओं ने बच्चे के मोबाइल की फोरेंसिक जांच, दवाओं के स्रोत और बैग छत तक पहुंचाने वाले व्यक्ति की पहचान समेत पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब DGP को देना होगा हिसाब
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब गेंद सीधे DGP के पाले में है। उन्हें व्यक्तिगत शपथ पत्र के जरिए यह बताना होगा कि शिकायतकर्ता अधिकारी को ही जांच की जिम्मेदारी कैसे मिली, जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए और उसी अधिकारी द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने का आधार क्या था।
24 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में DGP का जवाब इस मामले की जांच की दिशा तय कर सकता है।
फिलहाल हाईकोर्ट के सवाल ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—
अगर शिकायत लिखने वाला ही जांच करेगा, सबूत भी वही जुटाएगा और चार्जशीट भी वही पेश करेगा, तो जांच की निष्पक्षता पर भरोसा आखिर कैसे किया जाए?महिला को फंसाने की साजिश समेत याचिकाकर्ताओं के आरोप फिलहाल दावे हैं। इनकी न्यायिक पुष्टि होना बाकी है।
चर्चित ASI शैलेंद्र सिंह के खिलाफ अखबारों में प्रकाशित खबरों का विश्लेषण
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में पूर्व में पदस्थ रहे ASI शैलेंद्र सिंह के खिलाफ मिली गंभीर शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई से जुड़ी मुख्य बातें:
• लाइन अटैच की कार्रवाई: कोनी थाने में पदस्थ रहे एएसआई शैलेंद्र सिंह को उनके खिलाफ मिल रही लगातार शिकायतों के बाद लाइन अटैच (Line Attach) कर दिया गया था।
• गंभीर आरोप: शैलेंद्र सिंह पर अनुशासनहीनता, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे थे।
• उगाही की शिकायतें: बताया गया कि वे आम नागरिक से लेकर रसूखदारों से भी जबरन वसूली करने से नहीं हिचकिचाते थे।
• पुराना रिकॉर्ड: इससे पहले वे बिलासपुर के सिविल लाइन थाने में भी पदस्थ रह चुके हैं और तब भी उनके खिलाफ गंभीर शिकायतें के बाद asi के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई थी ।
नोट: यह जानकारी 5 जुलाई 2021 की रिपोर्ट के अनुसार है, जब उन्हें लाइन अटैच किया गया था।















